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वसीम रिज़वी का विरोध करने से पहले यह निर्देश ज़रूर पढ़ें, आप किस के ट्रैप में फंस रहे हैं? | Watan Samachar

अदालत में अपना पक्ष मज़बूत रखें और क़ुरान की शिक्षाओं को समझें और दूसरों को समझायें

By: मोहम्मद अहमद

 

  • वसीम रिज़वी की याचिका से मुसलमान उत्तेजित न हों!

  • अदालत में अपना पक्ष मज़बूत रखें और क़ुरान की शिक्षाओं को समझें और दूसरों को समझायें 

 

नयी दिल्ली: उत्तर प्रदेश शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में क़ुरान शरीफ़ की 26 आयतों को प्रतिबंधित करने के संदर्भ में दी गई याचिका पर कठोर प्रतिक्रिया देते हुए "इंडिया मुस्लिमस फॉर प्रोग्रेस एंड रिफॉर्म्स" (IMPAR) ने एक बार फिर कहा है कि वासीम रिज़वी की याचिका से हिंसा को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिस कि लिए उनको दण्डित किया जाना चाहिए. इम्पार ने कहा है कि याचिका से मुस्लिम समुदाय और देश के दूसरे नागरिकों की भावनाओं में एक व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है.

 

رضوی کی مخالفت اور احتجاج کرنے سے پہلے یہ خبر ضرور پڑھیں | وطن سماچار

 

इम्पार की ओर से कहा गया है कि वसीम रिज़वी ने भारत सरकार समेत 57 मुस्लिम संस्थानों और संगठनों को अदालत में पार्टी बनाया है. किसी को भी इस बात का अधिकार नहीं है कि वह क़ुरान में किसी तरह का कोई बदलाव करें. इस PIL के माध्यम से सिर्फ़ मुसलमानों के जज़्बात भड़काने की कोशिश की गई है. इस के ज़रिए मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ निगेटिव एजेंडा चलाने का प्रयास है, जिसे समुदाय को समझना होगा, अन्यथा बड़ा नुकसान हो सकता है. इम्पार ने कहा है कि याचिकाकर्ता की मंशा सस्ती लोकप्रियता पाने और खुद को CBI जाँच से बचाने कि सिवा कुछ भी नहीं है.

 

 

इम्पार ने अफ़सोस प्रकट करते हुए कहा है कि दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि क़ुरान के मानने वाले इस याचिका के बाद प्रदर्शन, आंदोलन और धरने के जाल में फँसते जा रहे हैं. मीडिया की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए इम्पार ने कहा है कि ख़ुशी की बात यह है कि TRP बटोरने में माहिर मीडिया ने पिछली नीतियों से शायद सीख लेते हुए इस बार क़ुरान के मामले में वैसा प्रचार नहीं किया जैसा कि उससे अपेक्षा की जा रही थी. इम्पार ने कहा है कि इस जनहित याचिका पर क़ानूनी विशेषज्ञों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता के पास इस याचिका के लिए कोई आधार नहीं है और आशा की जा रही है कि इस याचिका को अदालत ख़ारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर भरी जुर्माना लगाएगी, क्योंकि इस से पहले कोलकता हाई कोर्ट इस तरह की याचिका ख़ारिज कर चुकी है.

 

 

भारतीय मुसलमानों की प्रगति और उत्थान के लिए काम करने वाली संस्था इम्पार ने भारत के प्रधानमंत्री और क़ानून मंत्री से अपील की है कि वो इस याचिका पर भारत के अटॉर्नी जनरल को निर्देशित करें कि वह इस याचिका का विरोध करें और याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ दंडात्मक कार्रवाई की अदालत से आग्रह करें.

 

 

इस याचिका में पार्टी बनाये गए संगठनों और संस्थानों से इम्पार ने अपील की है कि वो इस PIL पर अपनी प्रतिक्रिया को सीमित करें और क़ानूनी तौर से अपने पक्ष को अदालत के सामने मज़बूती के साथ रखें और याचिकाकर्ता के खिलाफ माननीय न्यायालय से दंडात्मक करवाई की अपील करें. इम्पार ने कहा है कि जो लोग भी इस याचिका से विचलित और परेशान हैं वो क़ुरान की शिक्षाओं को सही तरीक़े से समझ कर लोगों तक पहुँचाए ताकि जो भी गलतफहमियां समाज में हैं वह दूर हों. इम्पार ने कहा है कि जज़्बात में आने की बजाए हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम सही तरीक़े से कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखें और क़ानूनी पहलुओं को मज़बूत तरीके से रखें.

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