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पिछड़ों और वंचितों को कुचलने की एक और कोशिश

Watan Samachar Desk
Nitin Raut

भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार दलित, पिछड़ों और वंचितों को कुचलने की एक और कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार की सिविल सेवा परीक्षा में  कड़ी मेहनत एवं परिश्रम से सफल उम्मीदवारों को सेवाओं के आवंटन मिलते है तथा जिस परिश्रम से आम युवा अलग-अलग, सरकारी विभागों के सेवा करने का मौका प्राप्त करते आ रहे हैं उस चयन  पद्धति में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने संबद्ध विभाग से पूछा है कि क्या ‘फाउंडेशन कोर्स’ पूरा होने के बाद सेवा/कैडर का आवंटन किया जा सकता है।

 

 

हालांकि अभी इसको लेकर अंतिम फ़ैसला नहीं लिया गया है। लेकिन इससे भारतीय जनता पार्टी और संघ की मानसिकता साफ़ तौर पर जाहिर होती है। 3 महीने के फ़ाउंडेशन कोर्स से अगर मेरिट तय होती है तो ऐसी आशंका है कि इसमें हेरा फेरी होगी। दलित, आदिवासी, ओबीसी की पहचान करके और उनको कम अंक देकर मेरिट लिस्ट में पीछे धकेल दिया जाएगा। जिससे उनको मिलने वाला हक़ मारा जाएगा।

 

सरकार का ये प्रयास आरक्षण को महत्वहीन बनाने तथा दलित, आदिवासी तथा ओबीसी समाज को इस अवसर से वंचित करने की एक पहल है। कांग्रेस अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. नितिन राउत का कहना है कि  “इसे अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी कतई स्वीकार नहीं करेगी। दलितों के हितों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस पार्टी ऐसी हर योजना का हर मंच पर पुरज़ोर विरोध करेगी। आरक्षण की व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।“

 

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