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बिग ब्रेकिंग: लाल किले को किसानों से खाली कराने की खबर!

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लाल किले को किसानों से खाली कराने की खबर. इस से पहले किसानों ने लाल किले पर किसान झंडा फहरा दिया था. ज्ञात रहे कि आजाद भारत के इतिहास में जय जवान जय किसान का नारा देने वाले भारत के poorv प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे को आगे बढ़ाते हुए किसानों ने aaj पहली बार लाल किले पर अपना झंडा लहरा दिया है और किसान आंदोलन को इस तरह से उन्होंने ऐतिहासिक बनाने की कोशिश की है. हालांकि लाल किले की ओर किसान अब इस वक्त काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. हालांकि बाद में खबर यह मिली कि किसानों ने दोबारा से लाल किले पर क़ब्ज़ा कर लिया था.

By: वतन समाचार डेस्क

 

  • बिग ब्रेकिंग: लाल किले को किसानों से खाली कराने की खबर!

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लाल किले को किसानों से खाली कराने की खबर. इस से पहले किसानों ने लाल किले पर किसान झंडा फहरा दिया था. हालांकि बाद में खबर यह मिली कि किसानों ने दोबारा से लाल किले पर क़ब्ज़ा कर लिया था.

 

ज्ञात रहे कि आजाद भारत के इतिहास में जय जवान जय किसान का नारा देने वाले भारत के poorv प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे को आगे बढ़ाते हुए किसानों ने aaj पहली बार लाल किले पर अपना झंडा लहरा दिया है और किसान आंदोलन को इस तरह से उन्होंने ऐतिहासिक बनाने की कोशिश की है. हालांकि लाल किले की ओर किसान अब इस वक्त काफी तेजी से बढ़ रहे हैं.

 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ITO और आसपास तक पहुंचे किसान अब सीधे लाल किले पर पहुंच रहे हैं. मीडिया खबरों के अनुसार किसानों ने लाल किले पर अपना झंडा फहरा दिया है और जिस तरह से किसानों ने कहा था कि वह इस आंदोलन को इतिहासिक बनाएंगे, उन्होंने इस आंदोलन को ऐतिहासिक बना दिया है.

 

 

 हालांकि अभी इस बीच सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है और हालात जिस तरह से हैं वह पुलिस के हाथ से पूरी तरह से फिसलते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि कई जगहों पर दिल्ली पुलिस और किसानों के बीच टकराव की खबरें मिल रही हैं. पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज किए जा रहे हैं. किसानों की ओर से पत्थर मारे जाने की भी खबरें हैं, लेकिन लाल किले पर किसानों का जत्था जिस तरह से पहुंचा है और जिस तरह से किसानों ने लाल किले पर किसान झंडे को लहराया है और जय जवान जय किसान के नारे को बुलंद कर रहे हैं और भारत के तिरंगे के साथ जिस तरह से वह अपने आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं, वह इसे कई मायनों में ऐतिहासिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

 

 

 अब देखना यह है कि इस पूरे मामले में सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और पुलिस इस मामले में क्या प्रतिक्रिया देती है. हालांकि किसान और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत पूरी तरह से विफल हो चुकी है. लगभग 45 - 50 घंटे की अलग-अलग मैराथन बैठकों के बावजूद कोई परिणाम नहीं निकला है और किसान सीधे-सीधे तीनों कृषी क़ानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

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