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कांग्रेस को बुर्के में चाहिए मुसलमान?

लोगों का कहना है कि जब पंडित ठाकुर दलित सभी समुदाय के लोग मंच पर थे तो फिर मुसलमानों से कांग्रेस को परहेज़ क्यों है, जिस के बाद यूपी के मुसलमानों ने एक नारा भी देना शुरू कर दिया है कि "कांग्रेस को मुसलमान बुर्के में चाहिए" और उसके एक बार नहीं बल्कि कई बार प्रमाण भी मिल चुके हैं.

By: MOHAMMAD AHMAD

 नयी दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ऐतिहासिक रोड शो के बाद जहां कांग्रेस पार्टी लोगों की उमड़ी भीड़ से गदगद है, और जश्न मनाने में जुटी हुयी है, वहीं उत्तर प्रदेश की एक बड़ी आबादी मायूस भी है और नाराज़ भी,  प्रियंका गांधी के रोडशो में अहम बात यह रही कि प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी के साथ बस/ट्रक  में आरपीएन सिंह राज बब्बर और एससी आयोग के पूर्व चेयरमैन व मौजूदा राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया नजर आए, लेकिन कोई मुसलमान उनके साथ इस रोड शो में नजर नहीं आया, जिस से यूपी के मुसलमानों में कांग्रेस को लेकर के सख्त गुस्सा और मायूसी है.

 

 लोगों का कहना है कि जब पंडित ठाकुर दलित सभी समुदाय के लोग मंच पर थे तो फिर मुसलमानों से कांग्रेस को परहेज़ क्यों है, जिस के बाद यूपी के मुसलमानों ने एक नारा भी देना शुरू कर दिया है कि "कांग्रेस को मुसलमान बुर्के में चाहिए" और उसके एक बार नहीं बल्कि कई बार प्रमाण भी मिल चुके हैं.

 

 अहम बात यह है कि कांग्रेस पार्टी मुस्लिम प्रवक्ताओं को टीवी चैनल या डिबेट में भेजने से भी डर रही है, जिसका सीधा सीधा मतलब है कि कांग्रेस को मुसलमान बुर्क़े में ही चाहिए. इसको लेकर के पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चाएं भी हैं. सोशल मीडिया से लेकर अख़्बारात में इसको लेकर के ख़बरें भी प्रकाशित होती रही हैं.

 

 कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता या लंबे समय तक प्रवक्ता रहे शकील अहमद से लेकर मीम अफजल, गुलाम नबी आज़ाद और सलमान खुर्शीद समेत सभी मुस्लिम प्रवक्ताओं को या तो हटा दिया गया है या उन्हें साइड लाइन केरे पूरी तरह बर्फ में डाल दिया गया है. अहम् बात यह है कि अजय माकन के समय में बनाए गए प्रवक्ताओं में से मुस्लिम प्रवक्ताओं को अभी तक नेशनल पैनल में या तो लिया नहीं गया या अगर लिया भी गया तो उन्हें नेशनल चैनल पर कभी जगह नहीं दी गई.

 

 यूपी के मुसलमानों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी अगर यह सोचती है कि मुसलमान जाएगा कहां तो वह इसकी ऐतिहासिक भूल है. उनका कहना है कि कांग्रेस की लंबे समय तक इसी सोच ने राज्यों में रीजनल पार्टियों को जन्म दिया. सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि अगर कांग्रेस पार्टी ने अभी भी होश के नाख़ून नहीं लिए और मुसलमानों को बुर्क़े में रखने के फार्मूले को खत्म नहीं किया तो यह कांग्रेस के लिए घातक हो सकता है.

 

 

 लोगों का कहना है कि यूपी से लेकर बंगाल, राजस्थान, असम, तिलंगाना, बिहार, जम्मू व कश्मीर, कर्नाटक, केरल, मुंबई समेत कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी का यह बर्ताव उसके चिराग को हमेशा के लिए गुल कर सकता है.

 

 हालांकि लोग यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष सब को साथ लेकर के चलना चाहते हैं, लेकिन उनको देखना होगा कि कौन लोग हैं जो उनके मिशन को तबाह करने पर आमादा है. कहीं आज भी कांग्रेस में कुछ आरएसएस के लोग छुपे तो नहीं है जो हिंदी पट्टी में कांग्रेस की जड़ों में गर्म पानी डाल रहे हैं, क्योंकि नरसंहा राव से लेकर आज तो क्कुह लोग उसी नारे को बढ़ा रहे हैं कि "WHY CONGRESS CANNOT COME INTO POWER WITHOUT UP AND BIHAR"?    

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