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आइये ! इस ईद कुछ नया करें

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AFROZ ALAM SAHIL

अफ़रोज़ आलम साहिल

 देश में तेज़ी से घट रहे अफ़रा-तफ़री के हालातों और नकारात्मक सोच की तेज़ी से बढ़ती बेलों के बीच मुक़द्दस ईद आ पहुंची है.


आईए! इस ईद के मौक़े पर एक नया संकल्प लें. संकल्प कुछ नया रचने का. कुछ नया पैदा करने का. एक नई सोच फैला देने का. एक दूसरे की मदद करने का. एक दूसरे की तरक़्क़ी में खुश होने का. एक दूसरे के दुखों को काटने की पूरज़ोर कोशिश करने का. मुल्क में फ़ैलाई जा चुकी नफ़रत की लकीरों को इंसानियत की चादर से पाट देने का. और इस ‘नए’ की जड़ में सिर्फ़ एक लफ़्ज़ अंगड़ाईयां ले रहा हो. और उस लफ़्ज़ का नाम है —हिन्दुस्तानियत…

बहुत हो चुकी नकारात्मकता की खेती, बहुत हो चुका तोड़ने, नष्ट करने, उखाड़ फेंकने और विरोध करने की जद्दोजहद… माफ़ कीजिएगा… नफ़रत का जवाब नफ़रत या विरोध से बिल्कुल भी नहीं दिया जा सकता. नफ़रत का अगर सचमुच जवाब देना है तो मुहब्बत का इस्तेमाल कीजिए… और इसके लिए इस ईद से बेहतर कोई और दिन हो ही नहीं सकता है. वैसे भी ईद मिठास घोलने का त्योहार है. ज़िन्दगी के खुशनुमेपन की सेवई में डूबो देने का पर्व है. एकता व भाईचारे का दिन है. आंतरिक प्रेम की वर्षा का दिऩ है. दुश्मनों से भी गले मिलने का दिन है.

तो आईए! इस ईद पर एक संकल्प लेते हैं. संकल्प प्यार की सेवई घर-घर पहुंचाने का. #PyarKiSevai को ज़िन्दगी जीने के जज़्बे के साथ जोड़ देने का. ये कोई मुश्किल काम नहीं है. ज़रूरत बस एक पहल की है. शुरूआत सबसे पहले अपने पड़ोस से हो. मुझे यक़ीन है कि एक रोज़ पड़ोस-पड़ोस से गुंथी जा रही मुहब्बत की ये माला पूरे देश में फैल जाएगी और नकारात्मक व नफ़रत की राजनीत के ज़हर को जड़ से ख़त्म कर जाएगी.

ये ईद इसी खुशनुमा व मुक़द्दस जज़्बे की गवाह बने. ऐसा ही हो, ऐसा ही फूले-फले. इसी दुआओं के साथ आप सभी को ईद मुबारक…


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति वतन समाचार उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार वतन समाचार के नहीं हैं, तथा वतन समाचार उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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