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कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी, तेलंगाना के लिए टीआरएस बेहतर

तेलंगाना चुनाव में जमात इस्लामी के जरिए टीआरएस को समर्थन दिए जाने के सवाल पर जमात के एक्टिंग अमीर ने कहा कि तेलंगाना में

By: Watan Samachar Desk

मोहम्मद अहमद

 नई दिल्ली: पत्रकारों से बातचीत करते हुए जमात-ए-इस्लामी हिंद के एक्टिंग अमीर नुसरत अली ने आज यहां मीडिया से बात चीत करते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस से गलतियां हो सकती हैं और हुयी हैं लेकिन वह भाजपा की तरह सांप्रदायिक पार्टी नहीं है. 


इस लिए जमात ने दिया टी.आर.एस. को समर्थन

 तेलंगाना चुनाव में जमात इस्लामी के जरिए टीआरएस को समर्थन दिए जाने के सवाल पर जमात के एक्टिंग अमीर ने कहा कि तेलंगाना में जमाते इस्लामी की लोकल यूनिट को लगता है कि वहां के लोगों के लिए टीआरएस ही बेहतर पार्टी है. उन्होंने कहा क्योंकि यूनाइटेड तेलंगाना में हमने कांग्रेस को देखा है इसलिए हमें ऐसा लगा कि वहां टीआरएस एक बेहतर सरकार दे सकती है, जबकि टीआरएस की गलतियों की एक लंबी सूची है उसके बावजूद राज्य के हित में टीआरएस बेहतर है.


जमीयत उलेमा के स्टैंड पर बोले जमात के एक्टिंग अमीर

 उन्होंने कहा कि हो सकता है जमीयत उलमा हिंद को लगता हो कि तेलंगाना के लिए कांग्रेस बेहतर है. हर कोई सोचने के लिए आजाद है. उन्होंने कहा कि तेलंगाना की सियायासत थोड़ी हटकर है. वहां धर्मनिरपेक्ष दलों के बीच लड़ाई थे जबकि दूसरे राज्यों में धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता की लड़ाई है. इसलिए सभी संगठन एक मत हैं कि धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता की जंग में धर्मनिरपेक्षता को ही आगे बढ़ाना है.


बाबरी पर जमात का स्टैंड

 बाबरी मस्जिद के मामले पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए जमात के एक्टिंग अमीर ने कहा कि हम कोर्ट को डिक्टेट नहीं कर सकते, कि कोर्ट क्या करे और क्या ना करे, लेकिन हां हमारी ख्वाहिश यह जरूर है कि फैसला जल्द आना चाहिए, क्योंकि इसमें काफी विलंब हो चुका है और देरी ठीक नहीं है, लेकिन यह कोर्ट पर निर्भर करता है कि वह आगे किस तरह से इस मामले को लेकर वह चलती है. उन्होंने कहा कि फैसला मस्जिद के हक में आए या मंदिर के हक में आए इन्साफ होना चाहिए. जो भी फैसला होगा मुसलमानों ने उसको स्वीकार करने की घोषणा कर दी है और वहां पर मस्जिद या मंदिर फैसला आने के बाद बनवाना सरकार की जिम्मेदारी है ना कि किसी धार्मिक या सामाजिक संगठन की.

खुदाई में जो मिला वह कोर्ट के पास 

बाबरी मस्जिद की जमीन की खुदाई पर मिले वाले बाक़ियात के संबंध में उन्होंने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वहां खुदाई में कुछ लोग कहते हैं मस्जिद के निशान मिले जबकि कुछ लोग कहते हैं कि मंदिर के निशान मिले. इंडिपेंडेंट सर्वेयर का यह कहना है वहां मस्जिद के निशान मिले लेकिन पूरी फाइल कोर्ट के पास है और यह उसे तय करना है कि वहां पर क्या होना चाहिए.

कोर्ट तय करे क्या करना है

उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म के अनुसार यह बात सत्य है कि अगर वहां मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी तो वहां मस्जिद नहीं हो सकती है, लेकिन पहले यह सिद्ध तो हो. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म के लोग यह कहते हैं कि अगर मस्जिद तोड़कर मंदिर बनाई जाती है तो यह धार्मिक दृष्टिकोण से ठीक नहीं है लेकिन सारा फैसला कोर्ट को करना है.


अदालत की साख पर बट्टा ठीक नही  

अदालत की गिरती साख पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में अदालत को लेकर के सवाल खड़े हुए हैं और देश की सबसे बड़ी कोर्ट के सबसे बड़े चार जजों ने भी इस ओर इशारा किया था. लेकिन हमारा कहना यह है कि अदालत की साख का गिरना देश और समाज के लिए ठीक नहीं है क्योंकि जब आदमी को हर जगह से ठुकरा दिया जाता है तो उसे कोर्ट ही एक सहारा नजर आता है. मीडिया का वक़ार भी संदेह के घेरे में   उन्होंने मीडिया की गिरती साख पर भी चिंता प्रकट करते हुए कहा कि आज भी मीडिया में कुछ लोग ऐसे जरूर हैं जो अच्छे काम करते हैं.


किसान आंदोलन को नज़र अंदाज़ ना करे सरकार  

किसानों की सूरते हाल पर चिंता प्रकट करते हुए जमात ए इस्लामी हिंद के एक्टिंग अमीर ने कहा कि किसानों के लिए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग के इंप्लीमेंटेशन का वादा किया था उसे सरकार को तत्काल प्रभाव से पूरा करना चाहिए क्योंकि किसानों के सब्र का इंतिहान लेना सरकार के लिए ठीक नहीं है. फिर भी पुलिस का रोले ठीक था जमात ए इस्लामी हिंद के एक्टिंग अमीर नुसरत अली ने कहा कि बुलंदशहर में जो घटना हुई है वह घटना भी चिंतनीय है. साथ ही उन्होंने पुलिस के काम की प्रशंसा करते हुए कहा कि सुबोध कुमार एक ईमानदार इंस्पेक्टर थे और उनके साथ हमारी पूरी सहानुभूति है.


सुबोध के क़ातिलों का पता लगाया जाये   

सरकार जिस तरह से गाय काटने वालों को खोज रही है उसी तरह से सरकार को सुबोध कुमार के कातिलों को भी खोजना चाहिए. और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में भेदभाव से काम लिया गया और गाय काटने वाले आजाद रह गए तो आगे भी वह सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं. इसलिए सरकार को संविधान में विश्वास रखते हुए धर्मनिरपेक्षता के साथ काम करना चाहिए.पुलिस को आज़ाद छोड़ दिया जाये  जमात ए इस्लामी हिंद के एक्टिंग अमीर ने कहा कि फसाद के बाद अब पुलिस का रवैया ठीक नजर नहीं आ रहा है और ऐसा लगता है कि पुलिस कहीं ना कहीं से वह कंट्रोल हो रही है. यह देश के लिए ठीक नहीं है.

 इसे पहले जमात ए इस्लामी हिंद के और वरिष्ठ समाजसेवी इंजीनियर सलीम ने मीडिया को मीडिया को ब्रीफिंग दी इस अवसर पर नुसरत अली और जमात ए इस्लामी हिंद के मीडिया इंचार्ज भी मौजूद थे

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