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कांग्रेस का राफेल को लेकर सनसनी ख़ेज़ इंकिशाफ

By: Watan Samachar Desk
Randeep Singh Surjewala, In-charge Communications Department, AICC addressed the media today at AICC Hdqrs.

 रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज एक बहुत गंभीर विषय लेकर हम आपके बीच में उपस्थित हुए हैं। राफेल घोटाले में देश के खजाने को हुए नुकसान की साजिश का भांडा फोड़ हो गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सीधे जिम्मेवार हैं और भ्रष्टाचार निरोधक कानून, प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट सीधा-सीधा अब प्रधानमंत्री मोदी जी पर लागू होता है। चौकीदार की चोरी आखिर रंगे हाथों पकड़ी गई है। राफेल सौदे की इंडियन नेगोसिएशन टीम, आईएनटी की रिपोर्ट अब जग जाहिर है। अब साफ है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश व संसद को सफेद झूठ बोलकर जान बूझ कर गुमराह किया, ताकि राफेल सौदे में भ्रष्टाचार, जालसाजी व देश की सुरक्षा से षड़यंत्रकारी खिलवाड़ पर पर्दा डाला जा सके। साजिश का भांडा फोड़ हुआ और चौकीदार की चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई। इसके तीन पहलू हम आपके समक्ष रखने जा रहे हैं। 

 

पहला, मोदी सरकार द्वारा खरीदे जा रहे 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की कीमत यूपीए कांग्रेस सरकार द्वारा खरीदे जा रहे 126 राफेल लड़ाकू जहाजों की कीमत से कहीं अधिक है। मोदी जी ने देश की संसद व देश को बरगलाया और देश के खजाने को चूना लगाया। कैसे -  इंडियन नेगोसिएशन टीम के मुताबिक ही 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की कीमत यूरो 8,460 मिलियन या 63,450 करोड़ रुपए है, ना कि 7,890 मिलियन यानि 59,175 करोड़ रुपए, जैसा मोदी सरकार द्वारा संसद और संसद के बाहर बेईमानी से दावा किया गया। 

 

मैं दोबारा दोहराता हूं, इंडियन नेगोसिएशन टीम के मुताबिक ही 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की कीमत 8,460 मिलियन है, जो 75 रुपए के हिसाब से हालांकि आज 80 रुपए के करीब का यूरो है, 75 रुपए प्रति यूरो के हिसाब से ये कीमत 63,450 करोड़ रुपए बनती है। जबकि मोदी सरकार ने दावा किया कि 36 जहाजों की कीमत 59,175 करोड़ रुपए हैं, जो एक बेईमानीपूर्ण दावा है, जो आईएनटी की रिपोर्ट से साफ-साफ झुठलाया जा रहा है। इतना ही नहीं, देश की आँख में धूल झौंकने का एक पहलू और भी है और वो क्या है – 8,460 मिलियन यूरो या 63,450 करोड़ रुपए भी असली कीमत नहीं है, क्योंकि इसका निर्धारण भी आईएनटी के द्वारा फ्रांस में 1.22 प्रतिशत प्रति वर्ष इन्फ्लेशन रेट के माध्यम से पौने 6 साल का ये इन्फ्लेशन रेट डाल कर आंका गया है। पर जहाज तो 10 साल बाद आएंगे, तो 10 साल का अगर 1.22 प्रतिशत भी है, सवा प्रतिशत भी इन्फ्लेशन रेट है तो वो भी आईएनटी की रिपोर्ट में पूरा नहीं आंका गया। यही नहीं, आईएनटी की रिपोर्ट में ये लिखा है कि अगर फ्रांस में इन्फ्लेशन रेट साढ़े तीन प्रतिशत तक हो जाएगा, तो सवा प्रतिशत नहीं ये सारा आकलन साढ़े तीन प्रतिशत प्रति वर्ष की इन्फ्लेशन रेट पर माना जाएगा। पर ये भी छोड़ दें, अगर 10 साल के बाद जहाज आएगा, 10 साल का सवा प्रतिशत भी इन्फ्लेशन रेट भी निकालें तो ये कीमत 9,000 मिलियन यूरो बनती है, यानि 67,500 करोड़ रुपए। ये कटु सत्य है जो आईएनटी की रिपोर्ट से अब साबित हो गया है। ये हम नहीं कह रहे हैं, ये मोदी जी की इंडियन नेगोसिएशन टीम की रिपोर्ट कह रही है। 

 

The falsehood and dishonesty as also corruption is now writ large based on the report of the Indian Negotiation team which has been placed in public domain and as per the report of the Indian Negotiation Team, the price of the 36 Aircrafts is 8,460 million Euros or Rs. 63,450 crore and not what is claimed by Prime Minister Modi and his Government which is 7,890 million Euros or 59,000 crores and the malfeasance has one more angle to it Even the price of 8,460 million Euros or 63,450 crores has been calculated by INT presuming an inflation rate of 1.22% per year in France and calculating it only for 5.75 years or less than 6 years. But the Aircrafts are not getting delivered as per INT for 10 years, then the price that has to be paid is for 10 years and then it would be 9,000 million Euros and what if, which INT now records, what if the inflation rate is up to 3-1/2% in France then Government of India and Modi Ji has committed that they will pay per year up to 3-1/2 % of inflation rate which will amount to 11,000-12,000 million Euros. Who will pay for this lost to exchequer.

 

दूसरा एंगल, राफेल जहाज खरीदने की बैंक गारंटी हटा चौकीदार ने देश को लूट लिया। ना इंडियन स्पेसिफिक इनहैंसमेंट की कीमत शामिल की और नाट्रांसफर ऑफ टेक्नोलोजी की। इसके छोटे-छोटे तीन सीधे पहलू हैं, जो भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं।

पहला, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में राफेल बनाने वाली दसॉल्ट एविएशन कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए बैंक गारंटी की शर्त को खारिज कर दिया, ये स्वयं प्रधानमंत्री जी ने कैबिनेट कमेटी ऑऩ सिक्योरिटी को चेयर करते हुए किया। इसके बावजूद भारत सरकार के कानून मंत्रालय, भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की डिफेंस अकाउंट सर्विसिज और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने लिखकर कहा कि बैंक गारंटी की शर्त को खारिज नहीं किया जा सकता। तो मोदी जी की डिफेंस मिनिस्ट्री कहती है - बैंक गारंटी होनी चाहिए और दसॉल्ट एविएशन वो दे। मोदी जी का रक्षा मंत्रालय ये कहता है कि बैंक गारंटी होनी चाहिए और दसॉल्ट एविएशन उसे दे। मोदी जी का कानून मंत्रालय ये कहता है कि बैंक गारंटी होनी चाहिए और लिखकर ये ओपिनियन देते हैं और उस बैंक गारंटी की कीमत इंडियन नेगोसिएशन टीम ने आंकी है 574 मिलियन यूरो, जो बनते हैं, 4,305 करोड़ रुपए। पर जब ये पूरा मामला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी में मोदी जी की अध्यक्षता में आया तो दसॉल्ट एविएशन को एक उपहार दिया और वो था 4,305 करोड़ रुपए का, जिसे सीएजी ने भी रिकोर्ड किया है, ये केवल मैं नहीं, सीएजी की रिपोर्ट भी कह रही है कि इसका सीधा-सीधा फायदा दसॉल्ट एविएशन को दिया गया है। कानून मंत्रालय इसका विरोध कर रहा है, रक्षा मंत्रालय इसका विरोध कर रहा है, वित्त मंत्रालय इसका विरोध कर रहा है, पर मोदी जी ये 4,305 करोड़ रुपए का तोहफा दे रहे हैं, दसॉल्ट एविएशन को अपने पद का दुरुपयोग करके। यही नहीं 36 राफेल जहाजों की कीमत में चालाकी से इंडियन स्पेसिफिक इनहैंसमेंट की 1300 मिलियन यूरो, यानि पौने 10,000 करोड़ की कीमत शामिल ही नहीं की गई, ताकि कीमत कम दिखाई जा सके।

While calculating the price of 36 Rafale Aircrafts, the cost of India specific enhancement, which is 1,300 Million Euros or Rs. 9,750 crore was not included. But it has to be paid that’s what on the INT record. Almost Rs. 10,000 crore have to be paid and look at the angle of corruption further. When we were buying with the same specifications 126 Rafale Aircrafts during Congress Party regime, the cost of India specific enhancements with same specification was 11.11 Million Euros or around Rs. 82-83 crores. It has suddenly gone up, same specifications, same India specification enhancements, but, when Modi Ji buys 36 Aircrafts, it goes up 350% to 271 crores per Aircraft. So, from Rs. 83 crore per Aircraft, it goes to Rs. 271 crore per Aircraft. Why, it is the same India specific enhancements, everything is the same and why are you not including its cost that has to be paid by India into the total value of the price of the Aircrafts.

तीसरा, किसी रक्षा सौदे में सबसे महंगी चीज ट्रांसफर ऑफ़ टेक्नोलॉजी है। इंडियन नेगोसिएशन टीम ने भी ये माना कि 126 जहाज जब कांग्रेस - यूपीए सरकार खरीद रही थी तो, उनकी कीमत में ट्रांसफर ऑफ़ टेक्नोलॉजी शामिल थी और इंडियन नेगोसिएशन टीम ने ये भी माना कि जब मोदी जी ने 36 राफेल जहाज खरीदे तो ट्रांसफर ऑफ़ टेक्नोलॉजी शामिल नहीं थी। इसके बावजूद भी कीमत ज्यादा क्यों है, वो पैसा किसकी जेब में गयाअगर आप 9,000 मिलियन यूरो में 1300 मिलियन आप जोड़ लें, इंडियन स्पेसिफिक इनहैंसमेंट के तो 36 लड़ाकू जहाजों की कीमत है - 10,300 मिलियन यूरो, ये मैं नहीं कह रहा हूं, ये इंडियन नेगोसिएशन टीम ने रिपोर्ट में लिखा है। 10,300 मिलियन यूरो जो बनते हैं - 77,250 करोड़ रुपए। मोदी जी कहते हैं, हमने 59,000 करोड़ रुपए में खरीद, पर देश को पड़ रहे हैं, 77,000 करोड़ रुपए में। कौन जिम्मेवार है, क्या भ्रष्टाचार साफ नहीं?


चौकीदार की तीसरी चोरी भी पकड़ी गई और वो क्या है – चौकीदार स्वयं इंडियन नेगोसिएशन टीम को बॉयपास कर 36 लड़ाकू जहाजों की नेगोसिएशन कर रहे थे। एक सनसनीखेज बात ये है कि 36 लड़ाकू जहाजों की खरीद का निर्णय इंडियन नेगोसिएशन टीम ने नहीं लिया, अब ये साफ है। 36 लड़ाकू जहाज की खरीद का निर्णय 12 और 13, मैं तारीख दे रहा हूं, चैक कर लीजिए, जनवरी, 2016 को अजीत डोभाल जी द्वारा फ्रांस के अंदर नेगोशियेट करके भारत सरकार की ओर से लिया गया। The decision and the price to buy 36 aircrafts was not done by the Indian Negotiation team, it was done by person who was neither authorized by Cabinet Committee on Security nor was he a part of the Indian negotiation team, that is Shri Ajit Doval in Paris, France on 12th and 13th January, 2016, incidentally the Contract was signed on 13th January, 2016.

 

अब ये जग जाहिर है कि 24 नवंबर, 2015 को रक्षा सचिव ने फाइल पर नोटिंग लिखकर एतराज किया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय आईएनटी, इंडियन नेगोसिएशन टीम को दर किनार कर सीधे राफेल जहाजों की खरीद की नेगोसिएशन कर रहा है, वो सारी प्रोसिडिंग आपने देखी है। जब ये सनसनीखेज खुलासा हुआ तब प्रधानमंत्री जी ने दबाव डालकर रक्षा सचिव से ये कहलवाया, “Kumar told that the noting was not about “parallel negotiations” but about “parallel viewpoints” and that the PMO had not interfered in the final negotiations.” कि फाईनल नेगोसिएशन में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कोई दखलअंदाजी नहीं की, ये उन्होंने कहलवाया था। अब वो चोरी भी पकड़ी गई, क्योंकि आईएनटी की रिपोर्ट के पैरा 11 से ये साफ है कि फाईनल नेगोसिशेएशन आईएनटी ने नहीं की, फाईनल नेगोसिशेएशन अजित डोभाल जी ने पेरिस, फ्रांस जाकर 12 और 13 जनवरी, 2016 को की और 13 जनवरी को ये कॉन्ट्रैक्ट साइन हो गया। क्या अजित डोभाल जी इंडियन नेगोसिएशन टीम का हिस्सा थे? जवाब ना में है। क्या अजित डोभाल जी को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने इंडियन नेगोसिएशन टीम को सुपरसीड कर इस डील को नेगोशिएट करने का अख्तियार दिया था, इसका जवाब भी ना में है। तो बात साफ है कि चौकीदार के नुमाईंदे चौकीदार की ओर से रक्षा मंत्रालय की, भारत सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अप्रूवड इंडियन नेगोसिएशन टीम को सुपरसीड कर सीधा नेगोशियट कर कॉन्ट्रैक्ट फाइनल कर रहे थे। 

 

राफेल सौदे में गड़बड़झाला और भ्रष्टाचार साफ है। साफ है कि प्रधानमंत्री जी ने अपने पद का दुरुपयोग कर राफेल बनाने वाली दसॉल्ट एविएशन कंपनी को नाजायज फायदा पहुंचा सरकार के खजाने को चूना लगाया है। 

 

The corruption and malfeasance in the Rafale deal is now out in the open. It is now clear that Prime Minister of India, Shri Narendra Modi misused his office to give benefit to Dassault Aviation and consequently caused loss to the public exchequer यह सीधे-सीधे प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13-(1) D का मामला है, This is a clear cut case of Section 13, (1)D of prevention of corruption act against the Prime Minister or India as also other offences under the Indian Penal Code.

 

प्रधानमंत्री के खिलाफ ये भ्रष्टाचार निरोधक कानून की 13-(1)D और भारतीय दंड संहिता की दूसरी धाराओं का मामला बनता है। अब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और इस मामले से जुड़े सब लोगों पर एफआईआर दर्ज कर जांच का समय आ गया है। 

 

It is now clear that corruption and malfeasance in Rafale deal is Writ large. It is clear that none less than Prime Minister of India caused loss to the public exchequer by misusing his office. It is a clear cut case of Section 13, (1)D of prevention of corruption act and other offences under the Indian Penal Code. Time has come to lodge an FIR to investigate and find the truth vis a vis the conduct of Prime Minister Shri Narendra Modi and others involved in the matter.

 

एक प्रश्न पर कि क्या कांग्रेस पार्टी राफेल मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तैयार है, श्री सुरजेवाला ने कहा कि आज पूरे मामले के तथ्य अब संज्ञान में आए हैं। ऑपरेशन कवरअप भी आज से ही शुरु हो जाएगा और उसका थोड़ा-थोड़ा आभास अब होने लगा है, परंतु बात बड़ी सीधी है, जब प्रधानमंत्री जी अपने पद का दुरुपयोग कर दसॉल्ट एविएशन को फायदा पहुंचाया और देश को चूना लगाया तो उनके ऊपर प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं होनी चाहिए, क्या ये हजारों करोड़ के राजस्व के नुकसान का मामला नहींहमें मालूम है कि सीबीआई भी आपकी, पुलिस भी आपकी, कानून भी आपका, सरकार भी आपकी तो आजकल तो लगता है कि सईया भये कोतवाल, तो कोतवाल पर पर्चा कौन दर्ज करेगापर ये साफ है कि कोतवाल पर मुकदमा दर्ज करने की जरुरत है। क्योंकि कोतवाल स्वंय प्रथम दृष्टि से दोषी है। कोतवाल का व्यवहार और उनका कार्य, पद के दुरुपयोग का मामला संदेह के घेरे में साफ-साफ खड़ा है और ये क्लियर कट केस है, For registration of an FIR against the Prime Minister of India. Time has now come for Prime Minister to prove that he is not guilty by agreeing and submitting to registration of an FIR and investigation against him and all others समय आ गया है कि अब प्रधानमंत्री जी, अगर उनके मन में अपने पद की गरिमा को लेकर, अपने पद की परिपाटी को लेकर थोड़ी सी भी चिंता है तो इन साक्ष्यों के आधार पर वो आगे आएं और कहें कि उनके ऊपर एफआईआर दर्ज हो और उनकी बाकायदा सीमित समय के अंदर जांच हो। 

 

एक अन्य प्रश्न पर कि सरकार की तरफ से ये भी कहा जा रहा है कि फाइल नोटिंग को छापना गलत है और वो अखबारों के खिलाफ भी कार्यवाही करेंगे, श्री सुरजेवाला ने कहा कि ये निर्णय अब आपको करना है। या तो इस देश का मीडिया पूरी उम्र के लिए सरकार का गुलाम बन जाएगा, जैसी आशँका व्यक्त की जा रही है और अखबार की सुर्खियां और टेलीविजन की सुर्खियां प्रधानमंत्री कार्यालय, आर.एस.एस. और बीजेपी के कार्यालय से भी निर्धारित होंगी। सरकारें आती हैं, बदलती हैं, पर निष्पक्षता के लिए, अपनी निर्भीकता के लिए, अपने साहस के लिए, अपनी बहादुरी के लिए इस देश के समाचार पत्र और मीडिया हमेशा जाने जाते हैं। तो या फिर वो निर्भीकता और साहस और प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ इस देश के प्रजातंत्र की रक्षा करेगा। राफेल का ये घोटाला प्रधानमंत्री का ये गड़बड़झाला इस बात की कसौटी होगा कि इस देश में प्रजातांत्रिक व्यवस्था से मीडिया की निष्पक्षता, निर्भीकता, साहस रहेगा या पूरी उम्र के लिए गुलामी की बेडियों के अंदर जकड़ा जाएगा। कांग्रेस पार्टी आपकी निर्भिकता और साहस के साथ खड़ी रहेगी और आपके अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी। मैं केवल इतना कह सकता हूं। सरकार में अगर हिम्मत है, मोदी जी अगर आपमें साहस है तो करिए मुकदमें दर्ज, लगाईए मीडिया के मुँह पर पट्टी और इस देश के हर नागरिक के के मुँह पर पट्टी और हाथ में हथकड़ी। हम आपको चुनौती देते हैं, आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मंच से, हमने अंग्रेजों के दमन को सहा और अंग्रेजों को हराया, आप किस खेत की मूली हैं।    

 

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या कांग्रेस पार्टी निर्भीकता दिखाते हुए एफआईआर दर्ज कराएगी इस मामले में, श्री सुरजेवाला ने कहा कि मैं इसका उत्तर पहले दे चुका हूं, मैं फिर दोहराता हूं, आज पहला दिन है, जब ये सारे साक्ष्य सार्वजनिक पटल पर आए हैं और आज हम आपके माध्यम से और आपकी जो पैनी नजर और खोजी पत्रकारिता की परिपाटी है, उसके माध्यम से, देश के नागरिकों की ओर से प्रधानमंत्री जी को कहते हैं कि प्रधानमंत्री जी अब प्राइमा फेसी साक्ष्य आपके समक्ष, आपके खिलाफ मौजूद हैं, अब प्रधानमंत्री मोदी जी को पद की गरिमा रखनी है और अगर प्रधानमंत्री जी समझते हैं, क्योंकि वो निर्दोष नहीं, दोषी हैं और दोषी ही जोर-जोर से चिल्लाता है, अगर आप निर्दोष हैं, तो आईए और कहिए कि ठीक है अगर ये प्राथमिक साक्ष्य उनके खिलाफ हैं तो मैं ये कहता हूं आईए एफआईआर दर्ज कीजिए, प्रधानमंत्री पद को नामजद कीजिए और उनके खिलाफ जांच बैठाईए। हम आपके माध्यम से, आपकी तेज तर्रार आवाज, जिसकी वो चर्चा करते हैं, देखते हैं कि कितनी तेजी से उस तेज तर्रार आवाज पर कार्यवाही करेंगे। 

 

एक अन्य प्रश्न पर कि प्रधानमंत्री जी पर एफआईआर तभी दर्ज हो सकती है, जब लोकपाल मौजूद हो, वो अभी नियुक्त है ही नहीं, श्री सुरजेवाला ने कहा किआपकी बात दुरुस्त है, परंतु लोकपाल कानून में इसका बाकायदा प्रावधान है, मैं मेरे वकील साथी यहाँ मौजूद हैं, मोहम्मद खान जी, एक मिनट के लिए वो आपके इस संशय को दूर करेंगे, इस धारा को बताकर।   

 

मोहम्मद खान ने कहा कि आपको याद होगा कि वर्ष 2013 में जब लोकपाल और लोकायुक्त का कानून पारित हुआ था, उसमें खासतौर से काफी चर्चा के बाद धारा 14 का इनक्लूजन किया था। धारा 14 खासतौर से से प्रधानमंत्री के संदर्भ में है। धारा 14 कहती है कि प्रधानमंत्री जी के खिलाफ कोई भी भ्रष्टाचार का आरोप लगता है तो उस पर कार्यवाही लोकपाल करेगी। धारा 14 में भी पूरा प्रोसिजर कार्यवाही का दिया हुआ है। प्रधानमंत्री अगर ये बोलते हैं कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, उसके बावजूद भी कार्यवाही हो सकती है, अगर लोकपाल में दो तिहाई मैंबर इस बात की अनुमति दें कि हाँ, ये पब्लिक सिक्योरिटी का मामला है, पब्लिक इंट्रस्ट का मामला है, जनहित का मामला है। तो इस वजह से शायद मोदी जी हिचकिचा रहे हैं, लोकपाल की स्थापना करने के लिए, क्योंकि वो जानते हैं कि जिस दिन स्थापना हो गई, उस दिन कार्यवाही रुक नहीं सकती। आप जानते हैं कि जब भी आईपीसी या प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट में किसी सरकारी मुलाजिम के खिलाफ कोई शिकायत होती है तो इजाजत लेनी पड़ती है, कार्यवाही करवाने से पहले, ये संशोधन ये सरकार पिछली जुलाई, 2018 में लाई है, मगर लोकपाल में ऐसी कोई जरुरत नहीं है। लोकपाल में कार्यवाही शिकायत पेश करने पर ही शुरु हो जाती है। 

 

इसी संदर्भ में श्री सुरजेवाला ने कहा कि इस देश में सदैव ये कानून रहा कि पद का दुरुपयोग करने वाले किसी व्यक्ति पर भी अगर मामला संज्ञान में आ जाए तो अदालतों ने ये भी कहा कि वो सेंक्शन डिनाई नहीं हो सकती, वो सेंक्शन देनी पड़ेगी और उसके खिलाफ मुकदमा चलेगा। लगता है मोदी जी को इस बात का आभास पहले से था और कहीं घबराहट भी थी। इसलिए 2018 में आनन-फानन में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट को बदलकर उसमें सेंक्शन की लिखित अनुमति का प्रावधान मोदी जी लेकर आए। वो आदमी जो ईमानदारी की दुहाई देकर सत्ता में आया था, वो भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए कानून लेकर आया। लगता है उनको इस फाइल की नोटिंग्स की, जो उन्हीं के पास है, इसकी जानकारी थी कि कभी ये सार्वजनिक होंगी तो फिर उससे बचने का क्या रास्ता निकाला जाएगा। लगता है कि आज उस कानून में संशोधन किया गया, क्यों किया गया, किस कारण से किया गया, आज वो जग जाहिर हो रहा है। 

   

एक अन्य प्रश्न पर कि इसके आलावा आपके पास तीसरा विकल्प क्या बचता है, श्री सुरजेवाला ने कहा कि सबसे बड़ा विकल्प देश की जनता है, एक व्यक्ति जो 2012-13, 2014 में चिल्ला-चिल्ला कर भ्रष्टाचार की दुहाई दे रहा था, जो हर मंच से आज हमारी वायुसेना और सेना के पीछे खड़े होकर वोट बटोरने का षड़यंत्र कर रहे हैं, जो हर मंच से भ्रष्टाचार के पीछे खड़े होकर अपना भाषण देते थे, आज प्राथमिक दृष्टि से उन पर स्वयं पद के दुरुपयोग का मामला जो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार कानून की परिधि में आता है, वो साफ है। ये हम नहीं कह रहे हैं, ये उनकी फाइल के कागजात जो सार्वजनिक हुए हैं, वो कह रहे हैं। तो ऐसे में जनता सबसे बड़ी अदालत है। जनता सबसे बड़ा कानून है, जनता सबसे बड़ा संविधान है और ये जनता है मोदी जी, ये सब जानती है और चोरों को पहचानती है।  

  

बेरोजगारी दर पर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि पहला मुद्दा इस देश में 45 साल में सबसे अधिक बेरोजगारी की दर है और क्योंकि बेरोजगारी की दर इतनी अधिक है, नौजवान दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं, 2 करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष यानि 10 करोड़ रोजगार देने का वायदा केवल 8 लाख रोजगार में तबदील होकर रह गया, यानि एक प्रतिशत से भी कम फिसड्डी साबित हुआ मोदी जी का रोजगार का वायदा। इसलिए वो पूरे देश का नेरिटिव बदल कर राष्ट्रीय सुरक्षा के पीछे खड़े हो, किसान, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था का निक्कमापन और इन सब बातों को दरकिनार करने में लगे हैं। परंतु वो जान लें, बहुत जल्द इसी मंच से बेरोजगारी के वो सारे आंकड़े पेश कर हम उनको बेनकाब करेंगे। दूसरा प्रश्न जो आपने पूछा, हमारा पहले दिन से ये मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के पास पूरा मामला है, जैसे वो उचित समझें निर्णय करें, जो वो निर्णय करें, सो सब पक्ष माने और सरकार उसे लागू करें। 

 

जनरल वी.के. सिंह द्वारा दिए बयान पर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि जनरल वी.के. सिंह वही व्यक्ति तो हैं जिन्होंने सिटिंग आर्मी चीफ जनरल सुहाग को डाकू कहा था। उसके बाद मोदी जी ने उनका प्रमोशन किया था, क्योंकि सिटिंग आर्मी चीफ को उन्होंने डाकू बताया था। थोड़ा सा वो उस जहाज में मौर्य साहब को ले जाएं, तो बड़ा अच्छा रहेगा, क्योंकि अभी-अभी उनके सबसे वरिष्ठ नेता उत्तर प्रदेश के मोर्य साहब ने ऐसा कहा है। तो मुझे उम्मीद है कि मौर्य साहब को वो जहाज में बैठा लेकर जाएंगे और पहली सीट पर वो स्वयं बैठेंगे।

  

On a question that Prime Minister has called opposition as ‘Maha Milavat opposition’, Shri Surjewala said- Prime Minister and Shri Amit Shah are going door to door holding alliance parleys and sewing up alliances. In the state of Tamil Nadu, Prime Minister did a Maha Milavati Gathbandhan. In the state of Bihar Prime Minister did a Milatavi Gathbandhan, in the state of Maharashtra, where Shiv Sena is there and they have called their bluff, Prime Minister still did a Milavati Gathbandhan, in many-many other states including Uttar Pradesh and Bihar, Prime Minister is doing a Maha Milavati Gathbandhan, So, I think that’s a question that he needs to first pose for himself before asking it to others  

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