Prithvi Shaw : 4 साल के थे तो मां की हो गई थी मौत

कपड़े पहनाने से लेकर खिलाने-पिलाने और मैदान में अभ्यास के लिए छोड़ने तक की जिम्मेदारी पिता पंकज ने सलीके से निभाई. भारतीय टीम के लिए खेलते हुए अपने पहले ही टेस्ट में शानदार शतक लगाने वाले पृथ्वी शॉ ने संघर्षों की पथरीली डगर पर पग भरते हुए सफलता का सफर तय किया है.

By: Watan Samachar Desk

 नई दिल्ली: IND v WI मैच में महज पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) का बल्ला खूब बोला.  वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट करियर के पहले ही मैच में पृथ्वी शॉ ने शानदार शतक जड़ा. महज 18 बरस के इस युवा की जिंदगी काफी संघर्षपूर्ण रही है. जब पृथ्वी शॉ महज चार बरस के थे तो सिर से मां की ममता की छांव उठ चुकी थी. इसके बाद से पिता पंकज  को बेटे के लिए मां का भी फर्ज निभाना पड़ा. पंकज ने बेटे के लिए  मां की कमी नहीं खलने दी.

 

 कपड़े पहनाने से लेकर खिलाने-पिलाने और मैदान में अभ्यास के लिए छोड़ने तक की जिम्मेदारी पिता पंकज ने सलीके से निभाई. भारतीय टीम के लिए खेलते हुए अपने पहले ही टेस्ट में शानदार शतक लगाने वाले पृथ्वी शॉ ने संघर्षों की पथरीली डगर पर पग भरते हुए सफलता का सफर तय किया है.

 

पृथ्वी शॉ का परिवार मूलतः बिहार के गया का रहने वाला है. हालांकि अब परिवार महाराष्ट्रियन बन चुका है. बहुत पहले उनके पिता गया से महाराष्ट्र आकर बस गए. तीन बरस की उम्र में ही पिता पंकज  पृथ्वी के दिलोदिमाग में क्रिकेट के प्रति रुचि और प्यार विकसित करने में सफल रहे.

इस साल जून में फादर्स डे पर वह एक तस्वीर लगाकर अपनी जिंदगी में पिता के महत्व को बयां कर चुके हैं. बकौल पृथ्वी," मेरे पिता ने जो मुझे सबसे बड़ा गिफ्ट दिया, वह है मुझपर भरोसे का." जब पृथ्वी शॉ चार वर्ष के थे, तभी मां की ममता का आंचल छिन गया. तब उनके पिता कपड़ों का बिजनेस करते थे. पत्नी की मौत के बाद बेटे के लालन-पालन की चुनौती सामने आई. पृथ्वी शॉ बचपन में अपने दोस्तों और पिता पंकज के साथ जेडब्ल्यू मैरिएट के  नजदीक बीच पर क्रिकेट खेला करते थे. उनके पिता उनके लिए गेंदबाजी करते थे. 11 साल की उम्र में जब पृथ्वी को एक कंपनी से सहयोग का ऑफर मिला तो परिवार विरार से  मुंबई में बस गया.

 

 शानदार खेल की बदौलत पृथ्वी ने जनवरी 2017 में  तमिलनाडु के खिलाफ मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया. पहले ही रणजी मैच में वह मैन ऑफ द मैच बने. फिर विजय हजारे ट्राफी भी खेले. इसी साल वह अंडर 19 क्रिकेट टीम के कप्तान बने. फिर 2018 के अंडर 19 विश्वकप के ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में  सौ गेंदों पर 94 रन बनाए. पृथ्वी शॉ की कप्तानी में तीन फरवरी को भारत ने अंडर 19 विश्वकप जीता. 2018 में दिल्ली डेयरडेविल्स ने 1.2 करोड़ में पृथ्वी शॉ को आइपीएल के लिए खरीदा था. अब गुरुवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले ही टेस्ट मैच में पृथ्वी ने इतिहास रच दिया.

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