क्या यहां भी मुसलमानों को नजरअंदाज करेगी कांग्रेस?

watansamachar desk


गुजरात विधानसभा चुनाव में नरम हिंदुत्व की राह पर चलने वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. गुजरात के बाद कर्नाटक विधानसभा के चुनाव की आहट आहट है ऐसे में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस क्या गुजरात में नरम हिंदुत्व का कार्ड चलेगी या फिर यहां मुसलमानों को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी यह सवाल पूरे देश को परेशान कर रहा है.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राहुल गांधी के कमान संभालने के बाद जिस तरह से नरम हिंदुत्व की पालिसी को अपनाया है वह इस बात की दलील है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने परंपरागत वोटों से हटकर बीजेपी के वोटों में सेंध लगाकर BJP को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन क्या यह काम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कर पाएगी यह एक अहम सवाल है.

गुजरात और कर्नाटक की चुनावी सियासत में यूं तो बड़ा फर्क है और अब तक कांग्रेस का पलड़ा ही भारी रहा है, इस के बावजूद देश की सबसे पुरानी पार्टी गुजरात की तर्ज पर ही यहां भी अपनी छवि के विपरीत रणनीति पर काम कर रही है.

भले ही एक तरफ कांग्रेस नेता और कर्नाटक के सीएम के. सिद्धारमैया कांग्रेस के साथ खुद हिंदुत्व का असली प्रतीक बता रहे हों, लेकिन वो मुसलमानों को भी साधने का कोई मौका नहीं गंवा रहे हैं.

सिद्धारमैया के बयानों पर गौर करें तो वो लगातार आरएसएस और बीजेपी की तीखी आलोचना कर रहे हैं. यहां तक कि इसी महीने वो ये भी कह चुके हैं कि बीजेपी और आरएसएस में भी अतिवादी हैं. वह महाभारत का जिक्र करते हुए बीजेपी की तुलना कौरवों से कर चुके हैं.

दूसरी ओर सिद्धारमैया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं. आज तक डाट इन के अनुसार 25 दिसंबर को अपलोड की गई यह तस्वीरें एक मजार की हैं. जहां सीएम सिद्धारमैया मन्नत मांगते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने टोपी भी पहनी हुई है. दरअसल, सिद्धारमैया गादड़ जिले के लक्ष्मेश्वर गए थे. यहां उन्होंने हजरत सय्यद सुलेमान बादशाह की दरगाह पर हाथ जोड़कर मन्नत मांगी.


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