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सुनो: ‘किसी कौम की शत्रुता हमें न्याय करने से ना रोक दे’

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मदरसा इम्तियाज़-उल-उलूम में दस्तार बंदी समारोह से इस्लामिक विद्वान, वासीम गाज़ी का संबोधन

नई दिल्ली, 21 अप्रैल: मस्जिद मजीदिया में चलने वाले मदरसा इम्तियाज़-उल-उलूम (नई दिल्ली मानसिंह रोड) में शैक्षणिक वर्ष 2017-2018 के अंत के अवसर पर कुरान पाक याद कर चुके 5 बच्चों की दस्तार बंदी का एक भव्य समारोह आयोजन किया गया, जिसमें इस्लामिक विद्वान, राजनेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता वासीम गाज़ी ने मुख्य अतिथि के तौर पर भाग लिया।

इस अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि आप अल्लाह के नबी के उत्तराधिकारी और खलीफा हैं। उन्होंने इस्लाम के गुणों का वर्णन किया और कहा कि हमें अपनी मान्यताओं को सही करना है और किसी को अल्लाह के साथ जोड़ना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो अपने हर पहलू में मानवता के लिये राहत का सामान लिए हुए है और हमें नाम से ही नहीं बल्कि काम से भी खुद को मुसलमान साबित करना है.

वसीम गाजी ने कहा कि ईमान वालों के लिए हर दौर में दुख और परेशानी आई है, लेकिन हमें कुरान के फरमान पर ही चलना है. हम को नहीं भूलना चाहिए कि 'किसी कौम की शत्रुता हमें न्याय करने से ना रोक दे' यही क़ुरान और इस्लाम का पैगाम है.

वासीम गाज़ी ने आगे कहा कि हमें हर एक के साथ न्याय करना है और यही इस्लाम है। श्री गाजी ने कहा कि यदि हम न्याय के साथ काम करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि एक दिन हम आगे बढ़ेंगे।

इस अवसर पर फिरोजशाह कोटला मस्जिद के शाही इमाम ने अपने संबोधन में कहा कि आज आप हाफिज हुए हैं और कल आप आलिम होंगे लेकिन याद रखें कि आलिम बिना अमल के वैसे ही है जैसे पेड़ बिना फल और ऐसा पेड़ कोई महत्व नहीं रखता है. हमें दूसरों को इस्लाम की दावत देने से पहले अपने स्वयं का बदलाव करना है।

काका नगर मस्जिद के नायब इमाम ने बच्चों को अपने संबोधन में बताया कि आप चिंता न करें. आप नबी के वारिस हैं और इस्लाम के सच्चे सिपाही. आप कुछ भी करें, लेकिन दीन और ईमान का सौदा न करें, आप को कमियाबी जरूर मिलेगी.

इस अवसर पर शेख आरिफ कासमी, शेख कासिम नूरी, मुफ्ती अब्दुश्शकूर, इमाम और उस्ताद शेख अब्दुल हक, शेख अबू बकर, परवेज हुसैन, नसीम अहमद समेत विभिन्न लोगों ने भाग लिया और छात्रों को पुरस्कार और प्रार्थनाओं से सम्मानित किया।

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