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जमीयत के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी की अपील पर ट्रंप के फैसले के खिलाफ तारीखी एहतेजाज

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Watan Samachar Desk
अपनी परंपरा के अनुसार ट्रंप के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे अमरीकी- मौलाना महमूद मदनी ई दिल्ली, 22 दिसंबर, वतन समाचार डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा येरूशलम को इजरायल की राजधानी घोषित किए जाने के खिलाफ आज जमीयत उलेमा-ए-हिंद की अपील पर पूरे देश में लगभग 1000 शहरों और कस्बों में एक साथ तारीखे विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें एक करोड़ से अधिक लोगों के शामिल होने का अनुमान है। अमेरिका के फैसले के खिलाफ किसी भी भारतिए संस्था की ओर से यह अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन रहा। जमीयत उलमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी की आवाज पर दिल्ली, मुंबई, पुणे, कोलकाता, गुवाहाटी, अगरतला, पटना, रांची, बनारस, कानपुर, मुजफ्फरनगर, देहरादून, गया, हैदराबाद, अहमदाबाद, ललितपुर, सूरत, बेंगलूर, चेन्नई सहित विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग प्रकार के नारे लिखे प्ले कार्ड उठाए हुए सड़क पर निकल पड़े और शांतिपूर्ण तरीके से इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किया। इस विरोध प्रदर्शन से पहले आज मस्जिदों में भी विशेष दुआ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बनारस में इस विरोध जुलूस का नेतृत्व करते हुए जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मनसूरपुरी ने 20 दिसंबर की शाम जमीयत के आहवान दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण परामर्श सभा में स्वीकृत संकल्प भी पढ़कर सुनाया। जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इजरायल की राजधानी यरूशलम को घोषित किये जाने की कड़े शब्दों में निंदा एवं भत्र्सना की है। प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह कदम, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के फैसलों के खिलाफ है जिनके तहत यह तय किया जा चुका है कि 1967 के युद्ध के दौरान इजराइल ने यरूशलम पर जबरन कब्जा किया है। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा यरूशलम को राजधानी बताना इजरायल के अवैध कब्जे को वैध बनाना है और यह हमेशा फिलिस्तीन के शांतिपूर्ण समाधान के विपरीत है। जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने जमीयत के इस व्यापक विरोध प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए कहा कि आज अमेरिका दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। इस का कारण केवल यह है कि वे लगातार उसका घमण्ड पर आधारित व्यवहार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लोगों को उनकी परंपरा के अनुसार अपने राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए। क्योंकि यरूशलम की समस्या पूरी दुनिया में इंसानियत से जुड़ी हुई है।

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