संवैधानिक दर्जे के लिए अल्पसंख्यक आयोग का बड़ा कदम

watansamachar desk
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नयी दिल्ली: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अनुसूचित जाति आयोग की तरह खुद को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की मांग से जुड़ा एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसे अगले महीने सरकार के पास भेजा जाएगा।

अल्पसंख्यक आयोग का कहना कि न्यायिक अधिकार नहीं होने के कारण वह अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा को प्रभावी रूप से नहीं कर पा रहा है।

आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक संवैधानिक दर्जा दिए जाने की मांग का एक प्रस्ताव तैयार किया है और आगामी 10 मई को आयोग की बैठक में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद इसे सरकार के पास भेजा जाएगा।

अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गैयूरुल हसन रिजवी ने इस बारे में ‘भाषा’ को बताया, ”हम अगले महीने सरकार के पास यह प्रस्ताव भेज रहे हैं। हम सरकार के समक्ष यह मांग रखेंगे कि हमारे आयोग को भी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की तरह संवैधानिक दर्जा दिया जाए ताकि यह आयोग भी ज्यादा प्रभावी ढंग से काम कर सके।”
उन्होंने कहा, ”हम एक विधायी (स्टेचुरी) संस्था है इसलिए किसी मामले में कार्रवाई के लिए सिर्फ सिफारिश ही कर सकते हैं। अनुसूचित जाति आयोग की स्थिति में ऐसा नहीं है। वो किसी भी मामले में खुद फैसला सुना सकते हैं क्योंकि उनके पास न्यायिक अधिकार हैं।”

 

दरअसल, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम-1992 के तहत बने अल्पसंख्यक आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की मांग कोई नयी नहीं है। संप्रग सरकार के समय भी कई बार यह मांग उठी थी। देश पहले अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ए आर अंतुले के समय इस सबन्ध में एक विधेयक भी तैयार हुआ था जो पारित नहीं हो सका।
वजाहत हबीबुल्ला ने अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष (फरवरी 2011 से फरवरी 2014) रहते हुए संवैधानिक दर्जे खासकर न्यायिक अधिकार देने की मांग कई बार उठाई थी।

रिजवी ने कहा, ”मैं नहीं जानता कि लंबे समय से उठ रही इस मांग को क्यों नहीं पूरा किया जा सका। बस मैं यह चाहता हूं कि अब इस मांग को सरकार की तरफ से स्वीकार कर लिया जाए।”

 

गौरतलब है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबन्धी विधेयक फिलहाल संसद में लंबित है।


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