देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना चाहता है दिव्यांग गुफ़रान, किया आप?

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मेरा बचपन का सपना है अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतूं. इसके लिए मैं अपने व्हीलचेयर के साथ अभ्यास  कर रहा हूं, लेकिन राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए मुझे रेसिंग व्हीलचेयर की ज़रूरत है, इसकी क़ीमत 1.5 लाख है। यदि आपको खेल के लिए मेरा जुनून दिखाई दे तो कृपया सहयोग दें.

 

 

गुलफाम अहमद: जन्म उत्तर प्रदेश के बिज्नोर जिला  दिनाक – 10/10/1990 को हुआ, एक साल की ही उम्र में दोनो पैर पोलियो जैसी घातक बीमारी से घ्रस्त हो गये जिसके इलाज के लिए माता पिता के साथ वर्ष 1991 में दिल्ली आ गए ,  पिता सिलाई का कार्य करते थे, जिस से घर का पलन पोशन कठिन समस्या से होता था. इस लिए उच्च शिक्षा के लिए खुद सिलाई फैक्टरी में कार्य किया और सोशल वर्क मे BA तक की पूर्ण शिक्षा प्राप्त कि. इसी के साथ आई टी आई से कंप्यूटर शिक्षा भी प्राप्त की. कम्प्युटर मे शिक्षा लेने के बाद नौकरी के लिये बहुत जगह प्रयास किया परनतु कम्पुटर मे नौकरी ना मिली फिर एक काल सेंटर मे नौकरी मिली. वहाँ 3 साल तक नौकरी की. माता पिता की सेवा के साथ साथ समाज को दिखाना था कि हौसले का मज़बूत इंसान भी  सब कुछ कर सकता है!

 

केसे शुरु हुइ शिक्षा?

 

मैं स्कूल के बच्चों को बहुत पसंद करता था और हमेशा स्कूल जाना चाहता था, लेकिन मेरी शारीरिक विकलांगता के कारण, परिवार ने कभी भी मेरी शिक्षा के बारे नहीं सोचा. बचपन में हमेशा स्कूल की सीढ़ियों पर जाकर बैठता था, एक दिन स्कूल के प्रिंसिपल ने मुझे देखा और बुलाकर मुझसे पूछा कि आप भी पढाई करो गे, मैं ने उत्सहित होकर जी में उत्तर दिया, तो शिक्षक ने मेरे माता-पिता से बात की और मेरा दाखिला कराया, जिस वजह मेरी पढ़ाई 8 साल की उम्र में शुरू हुई !

 

 

अन्य दिव्यांगो का खेलो मे मनोबल कैसे बढाया?

 

खेल में स्यवं की उपलब्धि के बाद बाकी अन्य दिव्यांगजन को खेल में परामर्ष और सहयोग दिया जिस के परिणाम स्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर 4 पदक जीते और श्वेता शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 1 रजत चाइना में जीता ओर राष्ट्रीय स्तर पर 4  पदक जीते.

 

आखिर हौसला कैसे मिला?

 

 

2013 से पहले 23 वर्ष की आयु तक जमीन पर बैठ कर यह सब सफर किया. फिर हिम्मत जगी ओर खड़े होने का फैसला लिया, डॉक्टर से सलाह लेने पर सेंट स्टीफेन्स हॉस्पिटल के मुख्य डॉक्टर मैथुव वरगेस ने 1 वर्ष का इलाज  बताया, जबकी 11 नवम्बर 2013 को 2 ऑपरेशन हुए और 45 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 1 माह घर पर स्वयं जी तोड़ व्यायाम के पश्चात मात्र 3 माह में  कैलिपर और बैसाखी की मदद से खुद को पैरों पर खडे  होकर चलने योग्य बनाया, जिससे हॉस्पिटल के सभी डॉक्टर और आसपास के सभी अन्य दिव्यांग मित्र आश्चर्यचकित हुए. यही नही स्वयं के ऑपरेशन के बाद अन्य दिव्यांगों को परामर्श दिया और 3 अन्य दिव्यांग जन ने भी ऑपरेशन कराया और सफलतापूर्वक खुद को खड़ा होकर चलने योग्य बनाया !

 

 

दिव्यांग स्पेशल राईड?

 

हमेशा खुद को कभी किसी से कमजोर नही समझना यही सोच मुझे हमेशा कुछ नया करने को प्रेरित करती है, अपने समान्य मित्रो से मिलने के बाद लोग राईड का सपना पूरा किया ओर साथ में अन्य दिव्यांगों के साथ आगरा और नैनी ताल तक का सफल सफर किया.

 

 

सांस्कृतिक गतिविधियां?

 

खेल के साथ बचपन से ही फैशन में रुचि थी. 2015 में मुंबई में व्हीलचेयर इंडिया के लिए आवेदन किया. वहां जाकर आश्चर्यकारी प्रदर्शन किया और व्हीलचेयर इंडिया का शीर्षक जीता.  इस शीर्षक के बाद कई शो में शो स्टार के रूप में कई मॉडलिंग शो में हिस्सा लिया,  इसी के साथ We Are One व्हीलचेयर नृत्य समूह में शामिल होकर अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया और व्हीलचेयर नर्तक के रूप में कई चरणों में भाग लिया !

 

 

 

 

प्रेरक वक्ता?

भोपाल मे अयोजित समर्थ अयोजन मे दिव्यांगों के प्रेरक वक्ता के रूप मे उनको जीवन मे खुश रहने के तरीके बताये , अपने जीवन मे आई समस्या ओर अन्य प्रेरक उदारहण देकर भोपाल की 500 से अधिक जनता का मनोबल बढाया, इसी के साथ हाल ही में चेन्नई मे ज़ुपिटर इवेंट के दौरान अन्य लोगों को प्रेरित किया. मै ने हमेशा किसी भी कार्य में खुद को किसी से कम नहीं समझा. हर उस काम को किया जिसे लोगों ने नामुमकिन बताया. हर उस समस्या का सामना किया जिसकी वजह से जीवन मे कठिनाई आई. मैं हमेशा खुदा से अपने लिये एसा जीवन चाह्ता हूँ जिसमे मुझे अलग अलग स्तर पर सभी प्रकार की समस्या का सामना करना पडे और मैं खुद को ओर ज्यादा दिक्क्तो से लड्ने योग्य बना सकूं.

 

 

 

राष्ट्रीय पेरा खेलो मे उपलप्ब्धि?

 

 

वर्ष 2008 में 11वी कक्षा में पढ़ाई के साथ नागपुर मे अयोजित पोवेर्लिफ्तिंग राष्ट्रीय स्तर पर खेल में भाग लेने का अवसर मिला तथा रजत पदक जीता इसी के साथ अलग अलग शहरों में जाकर राष्ट्रीय खेलों मे पदक प्राप्त किये तथा 18 से अधिक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त किये.

मेरा बचपन का सपना है अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतूं. इसके लिए मैं अपने व्हीलचेयर के साथ अभ्यास  कर रहा हूं, लेकिन राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए मुझे रेसिंग व्हीलचेयर की ज़रूरत है, इसकी क़ीमत 1.5 लाख है। यदि आपको खेल के लिए मेरा जुनून दिखाई दे तो कृपया सहयोग दें.

 

 

 

 

 

(गुलफाम अह्मद

पता – बी 272/22 सी , गली न. 6 सुभास मौहल्ला नोर्थ घोंडा दिल्ली 110053

फोन न.- 9716178632

इमेल- gulfam.ahmd@gmail.com)

 

 


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