शरीअत के खिलाफ न क़ानून मंज़ूर है और न आर्डिनेंस: जमीयत

watansamachar desk


जमीयत उलमा-ए-हिन्द की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जमीअत का सरकार को साफ़ जवाब

नई दिल्ली 12 जनवरी:

जमीयत उलमा-ए-हिन्द की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आज मदनी हॉल, 1.बहादर शाह जफर मार्ग, नई दिल्ली में मौलाना कारी सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें केन्द्र सरकार द्वारा पेश किए तीन तलाक संबंधी बिल और उत्तर प्रदेष में लाउडस्पीकर से संबंधित दिषा-निर्देषों सहित कई कौमी-मिल्ली मसाइल पर चर्चा की गई। जमीअत ने मीटिंग में एक प्रस्ताव पास करते हुए कहा है के तीन तलाक मसले पर सजा का जो मसौदा कानून है वह मुस्लिम तलाकशुदा महिला के साथ न्याय नहीं करता है, बल्कि सख्त अन्याय की आशंका है, इसलिए इसे हरगिज कबूल नहीं किया जा सकता है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

इस कानून के तहत पीड़ित महिला का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा। और उस के लिए दोबारा निकाह और नई ज़िन्दगी शुरू करने का रास्ता बिल्कुम ख़त्म हो जायेगा. इस तारक तलाक़ का असल मक़सद ही ख़त्म होजायेगा.

इसके अलावा, पुरूष को जेल जाने की सजा वस्तुतः महिला और बच्चों को भुगतनी पड़ेगी। इसके अलावा जिन लोगों के लिये यह कानून बनाया गया उनके प्रतिनिधियों, धार्मिक चिंतकों, विभिन्न शरीयत के कानूनी विषिषज्ञों और मुस्लिम संगठनों से कोई सुझाव नहीं लिया गया, सरकार हठधर्मी का रवैया अपनाते हुए इंसाफ और जनमत की राय को रोंदने पर आमादा नजर आती है। जो कि किसी भी लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। हम मानते हैं कि इस कानून के पीछे मुसलमानों पर किसी न किसी तरह यूनिफार्म सिविल कोड थोपने का प्रयास किया जा रहा है और इसका उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं के इंसाफ के बजाये मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित करना है। भारतीय संविधान में दिए गए अधिकारों के तहत मुसलमानों के धार्मिक और पारिवारिक मामलों में अदालतों एवं संसद को हस्तक्षेप करने का अधिकार हरगिज नहीं है, इसलिए अगर संसद कोई ऐसा कानून बनाएगी अथवा भारत सरकार द्वारा ऐसा कोई अध्यादेश लाया जाएगा जो धार्मिक कानून में हस्तक्षेप करता है, वह मुसलमानों के लिए हरगिज काबिले अमल नहीं होगा। और मुसलमान हर सूरत में शरीयत कानून का पालन करना अपना कर्तव्य समझता है और पालन करता करेगा।

सभी मुसलमानों से पुरजोर अपील है कि वे विशेषकर तलाक ए बिदत से पूरी तरह बचें और शरीअत के हुक्म के मुताबिक निकाह-तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों को तय करें, ताकि इस बहाने से सरकारों को हस्तक्षेप करने का मौका न मिल सके। घरेलू विवादों के मामले में, दीनी पंचायत के द्वारा फैसले का रास्तय अख्तियार करें और सरकारी अदालतों और मुक़दमाबाज़ी से परहेज़ करें।

इस प्रस्ताव के संदर्भ में कार्यकारिणी की कार्रवाई पर प्रकाश डालते हुए जमीयत उलमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि सरकार मुसलमानों पर शरीयत के खिलाफ कानून हरगिज न थोपे, सरकार जिस तरह का रवैया अपना रही है वह वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है।

मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि आज की बैठक इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से संबंधित मामलों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। और एक परस्तो पारित हुई जिस में कहा गया कि मस्जिद कि ज़िम्मेदार स्थानीय प्रषासन से अनुमति लेने के लिए कानूनी कार्रवाई पूरी करें। और अगर किसी जगह कोई परेशानी आती है तो उसके लिए जमीयत उलमा-ए-हिन्द के केन्द्रीय कार्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों के पदाधिकारियों से सम्पर्क करें। उत्तर प्रदेष सरकार से अपील है कि वह इस प्रकरण में साम्प्रदायिक भेदभाव न बरते बल्कि सभी सम्प्रदायों के साथ इंसाफ करें और सभी सम्प्रदायों के साथ समान व्यवहार करें।

कार्यकारिणी की बैठक में संगठन के सौ साल पूरे होने पर जश्न सालह तकरीबात पर भी चर्चा हुई, इससे संबंधित गतिविधियों को तेज करने के लिये एक-समिति का भी गठन किया गया। इसमें तय किया गया कि अगले साल २२ -२४ फ़रवरी 2019 में देवबंद में सौ साल पूरे होने पर बड़ा इजलास होगा।

कार्यकारिणी की बैठक में अध्यक्ष के अलावा मौलाना अमानुल्लाह कासमी उपाध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द, मौलाना महमूद मदनी, महासचिव जमीयत उलमा-ए-हिन्द, मौलाना हसीब सिद्दीकी, कोषाध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द, शकील अहमद सैयद एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी शिक्षक हदीस जामिया कासमिया, शाही मुरादाबाद, मौलाना रहमतुल्ला मीर कश्मीरी, मौलाना मतीनउल हक ओसामा प्रदेष अध्यक्ष उत्तर प्रदेष, जमीयत उलमा-ए-हिन्द मौलाना मुफ्ती अहमद देवालह गुजरात, मौलाना बदरूद्दीन अजमल, अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द, आसाम, मौलाना कारी शौकत अली वेट, मौलाना मोहम्मद रफीक मजहरी, अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द, गुजरात, मौलाना अब्दुल कुद्दूस पालनपुरी, मौलाना मुफती जावेद इकबाल, उपाध्यक्ष जीमयत उलमा-ए-हिन्द, बिहार, कारी मुहम्मद अमीन अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द, राजस्थान, मौलाना मोहम्मद इसलाम कासमी अध्यक्ष, जमीयत उलमा-ए-हिन्द, उत्तराखंड, मौलाना मुफ्ती मोहममद राशिद आजमी, शिक्षक दारुल उलूम देवबंद, मौलाना सैयद सिराजुद्दीन नदवी, अजमेर, मौलाना मोहम्मद आकिल गढ़ी दौलत, मौलाना अली हसन मजहरी, प्रबंधक जमीयत उलमा-ए-हिन्द, पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल, हाजी मोहम्मद हारून, भोपाल, मौलाना नियाज अहमद फारूक एडवोकेट, मुफ्ती अब्दुर्रहमान नोगावां सादात अध्यक्ष, जमीयत उलमा-ए-हिन्द अमरोहा, डॉक्टर सईद उद्दीन कासमी, मौलाना अब्दुल कादिर आसाम, मौलाना हकीमउद्दीन कासमी सचिव जमीयत उलमा-ए-हिन्द ने शिरकत की।


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