‘वाइट वॉश’ के लिए प्रधानमंत्री मोदी जा रहे हैं फिलिस्तीन?

watansamachar desk


नए दिल्ली, वतन समाचार डेस्क:

10 फरवरी 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिलीस्तीन के ‘रामल्ला’ पहुंचेंगे. यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला फिलीस्तीन दौरा होगा.

इस ऐतिहासिक दौरे की अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी निगाह रखने वाले मुस्लिम पॉलिटिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ तस्लीम रहमानी ने कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

Dr. Taslim Rahmani, National President of the Muslim Political Council of India

उन्होंने वतन समाचार से टेलीफोनिक बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फिलिस्तीन दौरा और वह भी सिर्फ ‘रमल्ला’ वाइट वॉश की सिवा कुछ नहीं है. उन्होंने कहा कि इजराईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भारत दौरे के बाद भारत की देश ही नहीं पूरी दुनिया में कड़ी आलोचना हो रही है, इस के वाइट वॉश के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘रामल्ला’ जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘रामल्ला’ के साथ साथ ‘गाज़ा’ और फिलिस्तीन के पश्चिमी किनारे के बारे में बात करते और वहां जाने के साथ पिछले 11 सालों से खुली जेल में रह रहे 18 लाख फिलिस्तीनियों के हक़ में बात करते तो हम उन की तारीफ भी करते, क्यों की मजलूमों के साथ खड़े होना हमारे देश की रिवायत रही है, लेकिन भारत ने अभी तक इन मज़लूमों के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जो समझ से बाहर है.

उन्होंने यह भी कहा कि हमास की लीडरशिप के भारत आने पर प्रतिबंध है, इस पर भी आज तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. उन्होंने कहा कि जो लोग खुले जेल में रह रहे हैं और जिनके मासूम बच्चे मारे जा रहे हैं और उनका हुक्का-पानी तक बंद करने की कोशिश हो रही है, उनके बारे में भारत की खामोशी ठीक नही है. और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके लिए आवाज उठानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि बापू की सरजमी से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजलूम फिलिस्तीनियों की बात अंतर्राष्ट्रीय फोरम पर जरूर उठानी चाहिए, क्योंकि बापू ने हमेशा फिलिस्तीन और इजराईल के मामले में फ़िलिस्तीएन के हक़ में मत दिए.

उन्हों ने कहा कि पिछले कुछ सालों में जिस तरह से हमारी विदेश नीति में बदलाव आए और हम इजराईल के करीब हुए हैं उस से कई माईनों में सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने कहा कि एक तरफ हम कहते हैं कि आतंकवाद से लड़ने में इजराइल के तजुर्बे का फ़ायदा उठा रहे हैं और उस की मदद के लिए हम 10 बिलियन डालर का हथियार खरीद रहे हैं, उस से यह सवाल खड़ा होता है कि इजराइल के लिए आतंकवादी कौन है?

उन्होंने कहा कि जिस तरह से इजराइली फौजी फिलिस्तीनियों पर गोलियां बरसाते हैं वह इस बात का सबूत है कि कहीं ना कहीं हम 10 बिलियन डॉलर से ज़ियादा के हथियार उस से खरीद कर उसे मजबूत कर रहे हैं और फिलिस्तीनियों पर होने वाले इस ज़ुल्म में साझीदार बन रहे हैं.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद हमेशा विदेश नीति को बैलेंस करने की कोशिश की है और भारत की विदेश नीति में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं. उन्होंने कहा कि भारत आज अंतर्राष्ट्रीय फोरम पर वह नहीं है जो पहले था. उन्होंने कहा कि आज भारत का कोई दोस्त नहीं है जो कि हमारे लिए दुख की बात है.

उन्होंने कहा कि हमारी अमेरिका और इजराईल से बढती नजदीकी हमें दुनिया में अकेला कर देगी. यह हमारे लिए ठीक नहीं है. इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.


क्या आपको ये रिपोर्ट पसंद आई? हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं. हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *