तेलंगाना में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा

watansamachar desk


भारत में पैदा हुई उर्दू भाषा को तेलंगाना सरकार ने उस का हक़ देने का फैसला करते हुए उर्दू जुबां के लिए एतिहासिक फ़ैसला लिया है। तेलानागा विधानसभा मे मंमुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने राज्य में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बनाने की घोषणा की।
ज्ञात रहे कि देश के पहले सिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद चाहते थे की भारत की राष्ट्र भाषा हिन्दुस्तानी हो, लेकिन उस वक़्त के कांग्रेस के नेताओं की वजह से ऐसा नहीं हो सका. मौलाना चाहते थे की अगर देश कि राष्ट भाषा हिन्दुस्तानी होगी तो उस में उर्दू हिंदी के साथ कई भाषाओँ के शमिल कर लिया जायेगा.

तेलंगाना सरकार के इस फैसले का मतलब यह हुआ की अब से सरकारी कामकाज में तेलुगू के बाद उर्दू में भी कामकाज किया जा सकेगा।

ज्ञात रहे की मुख्यमंत्री केसीआर बड़े फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं, और वह समाज के सभी वर्गों के बारे में सोचते हैं. अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, “लंबे समय से मांग की जा रही थी कि उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बनाई जाय। हालांकि, आंध्र प्रदेश का दृष्टिकोण तेलंगाना से अलग है। 23 जिलों में उर्दू भाषी लागू नहीं हैं, इसलिए वहां कुछ जिलों में यह लागू है और कुछ जिलों में नहीं है लेकिन हम यहां जिला स्तर पर नहीं बल्कि राज्य स्तर पर उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने का एलान करते हैं। अब पूरे तेलंगाना में उर्दू में भी कामकाज किया जा सकेगा।”

मुख्यमंत्री के इस फैसले से देश और राज्य में ख़ुशी का माहोल है. देश के हिन्दू और मुस्लिम समेत हर समाज के लोग मुख्यमंत्री के इस फैसले से काफी खुश हैं.


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