दलित छात्र के कत्ल पर मीडिया खामोश क्यों है?

watansamachar desk
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नई दिल्ली: इन दिनों देश के मेनस्ट्रीम मीडिया के एक बड़े हिस्से का एकमात्र एजेंडा मुस्लिम विरोध और राष्ट्रवाद को हवा देना रह गया है. वह अपनी सहूलियत के हिसाब से मुद्दों को उठाता है और मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल बनाता है.

चन्दन गुप्ता और अंकित सक्सेना की निर्मम हत्या पर इस मीडिया ने खूब प्रमुखता दी और इसका मकसद पीड़ितों को इंसाफ दिलाना नहीं, बल्कि मुस्लिम विरोध का माहौल भड़काना था.

अब इलाहाबाद में दिलीप सरोज नामक दलित छात्र की निर्मम हत्या पर यह मीडिया खामोश है क्योंकि इसमें मुस्लिम एंगल नहीं है.

गौरतलब है कि बीते शनिवार रात इलाहाबाद के कटरा इलाके में स्थित एक रेस्तरां में कुछ लोगों द्वारा मामूली कहासुनी के बाद दलित छात्र दिलीप कुमार सरोज की बेरहमी से पिटाई की गई थी. इस हमले के बाद आरोपियों ने बेसुध अवस्था में सड़क किनारे पड़े दिलीप पर पत्थरों से भी कई बार वार किया था और फिर मौके से फरार हो गए थे.वारदात के बाद रेस्तरां के मालिक अमित उपाध्याय ने एक अन्य के साथ मिलकर दिलीप को स्थानीय अस्पताल में दाखिल किया था. इसके बाद दिलीप का परिवार उन्हें एक अन्य अस्पताल में ले गया था जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी.

सवाल यह है कि अगर इस जघन्य घटना को मीडिया में वो प्रमुखता क्यों नहीं मिल रही है जो दूसरी घटनाओं को मिली थी.


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