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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से की मुलाकात

- ईद-उल-अजहा और कुर्बानी के कामों में नहीं होगी कोई रुकावट, दिल्ली पुलिस आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया, बैठक में सभी संयुक्त पुलिस आयुक्त भी मौजूद रहे - जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ईद-उल-अजहा मुसलमानों की अहम इबादत है, इसलिए कुर्बानी के जानवरों को खरीदने, बेचने और यातायात की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया जाए और कुर्बानी की प्रक्रिया में किसी तरह की कोई रुकावट न खड़ी की जाए

By: वतन समाचार डेस्क
  • जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से की मुलाकात

  • - ईद-उल-अजहा और कुर्बानी के कामों में नहीं होगी कोई रुकावट, दिल्ली पुलिस आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया, बैठक में सभी संयुक्त पुलिस आयुक्त भी मौजूद रहे

  • - जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ईद-उल-अजहा मुसलमानों की अहम इबादत है, इसलिए कुर्बानी के जानवरों को खरीदने, बेचने और यातायात की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया जाए और कुर्बानी की प्रक्रिया में किसी तरह की कोई रुकावट न खड़ी की जाए

 
नई दिल्ली, 20 जुलाई। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के दिशानिर्देश पर जमीयत के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज दिल्ली के पुलिस आयुक्त बालाजी श्रीवास्तव से नई दिल्ली स्थित नए पुलिस मुख्यालय में मुलाकात की और विशेष रूप से ईद-उल-अजहा और कुर्बानी को शांतिपूर्वक संपन्न कराने को लेकर बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुउद्दीन कासमी, मौलाना नियाज अहमद फारूकी और मौलाना अज़ीमुल्लाह सिद्दीक़ी  शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त को बताया कि कुर्बानी और ईद-उल-अजहा की नमाज मुसलमानों की महत्वपूर्ण इबादत है। जहां तक कुर्बानी का सम्बंध है तो वह आर्थिक रूप से सम्पन्न हर मुसलमान पर अनिवार्य है और समय के अंदर इसका कोई विकल्प नहीं है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि कुर्बानी के जानवरों को खरीदने, बेचने और लाने-ले जाने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया जाए और कुर्बानी की प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न की जाए। साथ ही ऐसे शरारती तत्वों पर नियंत्रण लगाया जाए जो जनता के बीच अफवाह फैलाते हैं। विशेषकर दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए जाएं और सांप्रदायिक तत्वों की साजिशों को विफल किया जाए।

मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को बताया कि उत्तमनगर  समेत दिल्ली कई  इलाकों में पुलिस अधिकारियों द्वारा मस्जिद में नमाज न पढ़ने से सम्बंधित माइक पर ऐलान करने की खबरें प्राप्त हुई हैं। इसी तरह बवाना में जानवर उठा ले जाने की शिकायत आई है। इसके कारण लोगों में गलतफहमी और भ्रम फैल रहा है। हालांकि पुलिस द्वारा इस तरह की कार्रवाई की कोई आवश्यकता नहीं है। पुलिस की यह जिम्मेदारी है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से इस त्योहार को सम्पन्न कराए।

कोविड-19 की सावधानियों को लेकर सामुदायिक स्तर पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य संगठनों के प्रयासों से काफी जागरूकता बढ़ी है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद सभी मुसलमानों से लगातार यह अपील करती रही है कि जिन पर कुर्बानी वाजिब (अनिवार्य) हो, वह जरूर करें। अलबत्ता प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से परहेज करें और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें। सार्वजनिक जगहों पर मांस, हड्डियों, गंदगी को डालने से बचें और जानवरों को खरीदने, बेचने और परिवहन में कानून पर पूरी तरह से अमल करें। साथ ही मास्क और सामाजिक दूरी आदि जैसी सभी शर्तों का पूरा पालन करें। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सोशल मीडिया और मस्जिदों के इमामों के माध्यम से इन संदेशों को प्रचारित किया है और पिछले अनुभवों से साबित हुआ है कि अधिकांश मुसलमान इसका पालन करते हैं।


प्रतिनिधिमंडल को सुनने के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त ने आश्वासन दिया कि दिल्ली पुलिस ईद-उल-अजहा के शांतिपूर्ण आयोजन में हर संभव सहयोग करेगी और मूल इबादत के आयोजन में किसी भी तरह की रुकावट नहीं आने देगी। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के शानदार इतिहास और देशभक्ति की प्रशंसा की और इस अवसर पर संवेदनशील क्षेत्रों के संयुक्त पुलिस आयुक्तों को बैठक में तलब किया और प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत की गई आशंकाओं से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने सभी संयुक्त पुलिस आयुक्तों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि मुसलमानों की मूल इबादत में कोई बाधा या रुकावट नहीं उत्पन्न होगी और संवेदनशील इलाकों में विशेष तौर पर निगाह रखी जाएगी। इस अवसर पर जो संयुक्त पुलिस आयुक्त उपस्थित रहे उनमें सेंट्रल रेंज के संयुक्त सीपी नरेंद्र सिंह बुंदेला, वेस्टर्न रेंज के संयुक्त सीपी ब्रजकिशोर सिंह, नार्दर्न रेंज के संयुक्त आयुक्त सुरिंदर यादव, साउथ रेंज के संयुक्त आयुक्त देवेश श्रीवास्तव  और नार्थ ईस्ट रेंज के संयुक्त आयुक्त सागर प्रीत हुड्डा शामिल थे।

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