तिलक मांझी राष्ट्रीय सम्मान-2021, हेतु बस्तर के डॉ राजाराम त्रिपाठी के नाम की दिल्ली में हुई घोषणा
नई दिल्ली: तिलक मांझी राष्ट्रीय सम्मान-2021, की चयन समिति ने सर्वसम्मति से छत्तीसगढ़ के बस्तर के कृषि उद्यमी, देश के जुझारू किसान नेता, साहित्यकार तथा जनजातीय सरोकारों, कला संस्कृति, साहित्य की मासिक पत्रिका "ककसाड़" के संपादक डॉ राजा राम त्रिपाठी को देश के प्रतिष्ठित "तिलक मांझी राष्ट्रीय सम्मान-2021" के लिए चयनित किए जाने की घोषणा की है।
यह विशिष्ट अवार्ड देश के आदिवासी समुदायों की सेवा, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण संवर्धन आदि उत्थान कार्यों में निस्वार्थ भाव से, लंबे समय से संलग्न संस्था अथवा व्यक्ति को प्रदान किया जाता है। अवार्ड के चयन हेतु निष्पक्ष चयनकर्ताओं की एक सर्वाधिकार संपन्न चयन समिति गठित की गई है। देश के वरिष्ठ पत्रकार शिवकुमार मिश्र वर्तमान में इस चयन समिति के अध्यक्ष हैं। डॉक्टर त्रिपाठी को पिछले तीन दशकों से देश के सघन वन क्षेत्र बस्तर के आदिवासियों के लिए विशेषकर युवाओं तथा महिलाओं के लिए निस्वार्थ भाव से की गई सेवा कर रहे हैं। देश की कृषि तथा किसानों से संबंध समस्याओं, कृषि एवं ग्रामीण अर्थशास्त्र के वे गंभीर चिंतक तथा विशेषज्ञ माने जाते हैं। बस्तर के अपने खेतों को उन्होंने मानो प्रयोगशाला बना दिया है, जहां पर नित नई नई फसलों तथा कृषि नवाचारों पर शोध कार्य करते हैं।
वह देश की वर्तमान किसान आंदोलन के सैद्धांतिक सूत्रधार माने जाते हैं किंतु उनका सरोकार विशुद्ध किसानों की समस्याओं पर ही केंद्रित रहा है। गांधीजी तथा विनोबा जी की विचारधारा से प्रभावित डॉ त्रिपाठी किसी भी प्रकार के दलीय राजनीतिक एजेंडे से सदैव पूरी तरह से दूर रहे हैं, और उन्होंने जनजातीय समुदाय देश की कृषि, पर्यावरण तथा जैव विविधता संरक्षण संवर्धन तथा विशेष रूप से देश की विलुप्त हो रही वन औषधियों को बचाने के कार्य को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। पर्यावरण संरक्षण के कार्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित “हरित योद्धा अवार्ड’’ ( ग्रीन वारियर अवार्ड) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
उनके द्वारा विकसित की गई काली मिर्च की नई किस्म, जोकि अन्य सभी किस्मों से ज्यादा उत्पादन देती है तथा राजस्थान जैसे गर्म प्रदेशों में भी जिसकी भली-भांति खेती की जा सकती है, देश के 25 से अधिक राज्यों में किसानों के बीच बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसके अलावा उन्होंने स्टीविया अर्थात मीठी तुलसी ऑस्ट्रेलियन टीक इन्सुलिन प्लांट तथा सफेद मूसली की नई प्रजातियों को विकसित करने पर भी ठोस कार्य किया है। उनकी इन्हीं उपलब्धियों के कारण उन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ किसान का अवार्ड तीन बार दिया जा चुका है। उन्हें देश के वैज्ञानिकों के राष्ट्रीय संगठन के द्वारा "हर्बल कृषि वैज्ञानिक" का राष्ट्रीय अवार्ड भी दिया गया है।
बस्तर के बदलते आर्थिक सामाजिक परिवेश को उन्होंने अपने कविताओं में ढाला है। उनके बहुचर्चित कविता संग्रह ‘मैं बस्तर बोल रहा हूं’, जिसका अनुवाद अंग्रेजी तथा मराठी में क्रमशः "यस इटज बस्तर स्पीकिंग" तथा "मी आदिवासी बोलतोय" के नाम से अनुवाद भी हो चुका है। विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वाले डाक्टर त्रिपाठी के देश विदेश में स्थित अनुयायियों की संख्या लाखों में है, और वर्तमान में यह कहना अतिशयोक्ति ना होगा कि डॉ राजाराम त्रिपाठी एक व्यक्ति के बजाय अब अपने आप में एक विशाल संस्थान बन चुके हैं।
डॉ त्रिपाठी को नई दिल्ली में 28 नवंबर, 2021 को “गांधी शांति प्रतिष्ठान” आयोजित एक समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
ताज़ातरीन ख़बरें पढ़ने के लिए आप वतन समाचार की वेबसाइट पर जा सक हैं :
https://www.watansamachar.com/
उर्दू ख़बरों के लिए वतन समाचार उर्दू पर लॉगिन करें :
http://urdu.watansamachar.com/
हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें :
https://www.youtube.com/c/WatanSamachar
ज़माने के साथ चलिए, अब पाइए लेटेस्ट ख़बरें और वीडियो अपने फ़ोन पर :
आप हमसे सोशल मीडिया पर भी जुड़ सकते हैं- ट्विटर :
https://twitter.com/WatanSamachar?s=20
फ़ेसबुक :

यदि आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो आप इसे आगे शेयर करें। हमारी पत्रकारिता को आपके सहयोग की जरूरत है, ताकि हम बिना रुके बिना थके, बिना झुके संवैधानिक मूल्यों को आप तक पहुंचाते रहें।
Support Watan Samachar
100 300 500 2100 Donate now






Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.
Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.