Hindi Urdu TV Channel

NEWS FLASH

Jamat-e-Islami Hind ने नेपाल में क्या क्या देखा?

जमाअत का प्रतिनिधिमंडल नेपाल से लौटा, ज़मीनी हालात का जायज़ा लेने के बाद राहत कार्य शुरू किए प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाति-आधारित भेदभाव, SIR और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे उठाए

By: वतन समाचार डेस्क

 

Jamat-e-Islami Hind ने नेपाल में क्या क्या देखा?

जमाअत का प्रतिनिधिमंडल नेपाल से लौटा, ज़मीनी हालात का जायज़ा लेने के बाद राहत कार्य शुरू किए

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाति-आधारित भेदभाव, SIR और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे उठाए

 

नई दिल्ली: 07 अगस्त को भोटे कोशी-त्रिशूली नदी कॉरिडोर में अचानक आई भयानक बाढ़ के बाद ज़मीनी हालात का जायज़ा लेने के लिए नेपाल के तीन दिन के दौरे पर गया जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का प्रतिनिधिमंडल वापस लौट आया है। तहक़ीक़ात और सुझावों के आधार पर जमाअत नेपाल के नियमों और कार्यक्षेत्रों से जुड़ी सीमाओं में रहते हुए आपातकालीन राहत के उपाय तैयार करके उन्हें कार्यरूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दिल्ली स्थित जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए  इसके राष्ट्रीय सचिव मौलाना शफी मदानी ने कहा कि तबाही का स्तर असामान्य है। सबसे पहली प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवा, पानी और अन्य ज़रूरी मदद पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार और उसकी एजेंसियां बेहद मुश्किल हालात में सराहनीय काम कर रही हैं, लेकिन आपदा के स्तर और विस्तार के मद्देनज़र उनकी कोशिशों की भी सीमाएं हैं। बचाव कार्य अभी भी जारी है और प्रभावित इलाकों से लोगों को जीवित निकाला जा रहा है।

 

 दीर्घकालिक पुनर्वास आवश्यकताओं के बारे में निष्कर्ष निकालना या उनके लिए विस्तृत योजना शुरू करना जल्दबाजी होगी। मौलाना शफ़ी मदनी ने कहा कि एक और अहम चिंता की बात यह है कि जिन्होंने इस आपदा में अपने परिजनों, घरों, रोज़गार और संपत्ति को खो दिया है नेपाल सरकार अब तक उन लोगों के मुआवज़े के बारे में कोई घोषणा नहीं की गयी है। जमाअत का मानना है कि फ़िलहाल बचाव और आपातकालीन राहत पर ही ध्यान केंद्रित किया गया है।

 

 

प्रथम चरण में कानूनी दायरे के भीतर केवल सीमित आपातकालीन राहत गतिविधियां ही की जा रही हैं। जब बचाव कार्य पूरे हो जाएं, नुकसान का सही अंदाज़ा लग जाए और प्रभावित समुदायों की ज़रूरतों के बारे में साफ़ जानकारी मिल जाए तभी पुनर्वास और पुनर्निर्माण जैसे दीर्घकालिक कार्य किए जा सकते हैं। 

 

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद नेपाल सरकार, सुरक्षा एजेंसियों, स्थानीय समुदायों और मानवीय संगठनों के प्रयासों की सराहना करता है और राहत व पुनर्वास कार्यों में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।

 

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफ़ेसर सलीम इंजीनियर ने संवैधानिक सुरक्षा उपायों और प्रगतिशील कानूनों के बावजूद जाति-आधारित भेदभाव और अत्याचारों के जारी रहने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि NCRB के ताज़ा आँकड़े बेहद चिंताजनक हैं; 2023 में अनुसूचित जातियों के ख़िलाफ़ 57,789 अपराध दर्ज किए गए, जबकि लंबे समय में अनुसूचित जनजातियों के ख़िलाफ़ अपराधों में भी तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। हाल की घटनाओं जैसे - मध्य प्रदेश में एक दलित स्कूली छात्र के साथ मारपीट और जातिसूचक दुर्व्यवहार की खबर और राजस्थान में दो दलित पुरुषों के अपमान के आरोप हैं - से यह पता चलता है कि जातिगत भेदभाव रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लोगों की गरिमा और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। 

 

 

 

प्रोफ़ेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट जैसे कानून ज़रूरी हैं, लेकिन सिर्फ़ कानूनों से उस सामाजिक सोच को खत्म नहीं किया जा सकता जो अपमान और बहिष्कार को बढ़ावा देती है। उन्होंने मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने, तेज़ी से जांच और मुक़दमा चलाने, पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास, तथा भेदभावपूर्ण सोच को बदलने के लिए लगातार नैतिक और शैक्षिक प्रयास करने की मांग की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस्लाम जन्म, जाति, नस्ल या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव को नकारता है और हर इंसान की स्वाभाविक गरिमा को मान्यता देता है।

 

 

मीडिया को जानकारी देते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के एक अन्य उपाध्यक्ष एस. अमीनुल हसन ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) और इससे असली वोटरों के वोट देने का अधिकार छिनने की संभावना पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर लोगों के नाम सूची से हटाए जाने की ओर इशारा किया, और खासकर पश्चिम बंगाल के अनुभव का ज़िक्र किया, जहाँ SIR अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा निपटाई गई 82,782 अपीलों में से 91% यानी 75,443 लोगों के नाम वोटर लिस्ट में वापस जोड़े गए। उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं हो सकता कि कोई नागरिक किसी चूक का पता लगा सके और दावों व अपीलों की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर सके। धार्मिक आज़ादी के मुद्दे पर उन्होंने भारत में धार्मिक आज़ादी और अंतरात्मा की आज़ादी पर असर डालने वाली बढ़ती कानूनी पाबंदियों और सामाजिक रुकावटों पर गंभीर चिंता जताई।

 

 

 उन्होंने कहा कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में हाल ही में एक ऐतिहासिक मस्जिद को गिराया जाना भारतीय लोकतंत्र पर एक धब्बा है और इसने धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और कानून के शासन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई ने विध्वंस कार्यवाही के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन पर भी गंभीर सवाल खड़े किय हैं। अगर दशकों से सार्वजनिक और लगातार इस्तेमाल हो रहे किसी इबादतगाहों का फ़ैसला कुछ तुनकमिज़ाज़ नेताओं और उनके इशारों पर चलने वाले अधिकारियों द्वारा किया जा सकता है, तो हमारी राजनीतिक व्यवस्था और कानून के शासन पर से हमारा भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में दो मुस्लिम महिला पत्रकारों, शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का भी ज़िक्र किया और कहा कि धार्मिक पहचान भेदभाव या अलग तरह के बर्ताव का आधार नहीं बन सकती। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हर नागरिक के लिए बिना किसी डर, दबाव या गैर-कानूनी दखल के अंतरात्मा की आज़ादी, धार्मिक आज़ादी और प्रेस की आज़ादी की रक्षा की जानी चाहिए। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का कहना है कि मनमाने ढंग से सत्ता के इस्तेमाल के बजाय न्याय, उचित प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

 

ताज़ातरीन ख़बरें पढ़ने के लिए आप वतन समाचार की वेबसाइट पर जा सक हैं :

https://www.watansamachar.com/

उर्दू ख़बरों के लिए वतन समाचार उर्दू पर लॉगिन करें :

http://urdu.watansamachar.com/

हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें :

https://www.youtube.com/c/WatanSamachar

ज़माने के साथ चलिए, अब पाइए लेटेस्ट ख़बरें और वीडियो अपने फ़ोन पर :

https://t.me/watansamachar

आप हमसे सोशल मीडिया पर भी जुड़ सकते हैं- ट्विटर :

https://twitter.com/WatanSamachar?s=20

फ़ेसबुक :

https://www.facebook.com/watansamachar

यदि आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो आप इसे आगे शेयर करें। हमारी पत्रकारिता को आपके सहयोग की जरूरत है, ताकि हम बिना रुके बिना थके, बिना झुके संवैधानिक मूल्यों को आप तक पहुंचाते रहें।

Support Watan Samachar

100 300 500 2100 Donate now

You May Also Like

Notify me when new comments are added.

Poll

Would you like the school to institute a new award, the ADA (Academic Distinction Award), for those who score 90% and above in their annual aggregate ??)

SUBSCRIBE LATEST NEWS VIA EMAIL

Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.

Never miss a post

Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.