इतालवी सांस्कृृतिक केन्द्र मेें लियोनार्डो दा विंची पर जामिया छात्रों के कार्याें की प्रदर्शनी
विश्व के मशहूर चित्रकार, मूर्तिकार और वास्तुकार लियोनार्डो दा विंची पर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले इस विश्वविद्यालय के छात्रों के चुनिंदा कला कार्यों की इतालवी सांस्कृतिक केन्द्र, नयी दिल्ली में, 20 सितंबर से प्रदर्शनी शुरू होगी।
जामिया के आर्किटेक्चर एंड एकेस्टिक्स विभाग और इतालवी सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा, 16 से 18 सितंबर तक लियोनार्डो दा विंची पर आयोजित इस इंटरनेशलन वर्कशाॅप में 22 विभागों के 350 छात्रों ने हिस्सा लिया।
इस वर्कशाॅप का संचालन इटली के मिलान स्थित, म्यूजियो डेल सेनकोलो विंसियानो के निदेशक चियारा रोस्टैग्नो ने किया।
लियोनार्डो की 500वीं पुण्य तिथि के मौके पर आयोजित इस वर्कशाॅप के दौरान, इस महान कलाकार के कला, वास्तुकला, योजना, मूर्तिकला, दर्शनशास्त्र और विज्ञान के क्षेत्र में किए गए योगदान पर चर्चा हुई।
इस वर्कशाॅप का मकसद विज्ञान, इंजीनियरिंग और आर्ट्स के क्षेत्र के बारे में छात्रों में रचनात्मकता और दूरदर्शिता को प्रोत्साहित करना था। इस वर्कशाॅप में जामिया के मैथमेटिक्स, आर्किटेक्चर, मास कम्युनिकेशन, इंजीनियरिंग, इंग्लिश और फिज़िक्स विभाग आदि के छात्रों ने हिस्सा लिया।
वर्कशाॅप के उद्घाटन सत्र में अन्य लोगांे के अलावा आर्किटेक्चर विभाग की डीन प्रो हिना ज़िआ, इसी विभाग प्रमुख प्रो एस एम अख़्तर, इतालवी सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक आन्द्रेय बाल्डी और इतालवी दूतावास के डिप्टी एम्बेसेडर पीएत्रो सफेरा करिनी शामिल हैं।
जामिया के रजिस्ट्रार ए.पी. सिद्दीकी समारोह के मुख्य अतिथि थे। अपने मुख्य भाषण में उन्होंने लियोनार्डो के कार्यों की सराहना की और कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में किए गए उनके कार्यों से समाज को बहुत कुछ सीखने को मिला है। जामिया मिल्लिया और इतालवी सांस्कृतिक केन्द्र के बीच बढ़ते रिश्तों का उन्होंने उल्लेख किया।
इतालवी सांस्कृति केन्द्र के निदेशक आन्द्रे बाल्डी ने जामिया और इतालवी दूतावास के बीच बने मज़बूत सहयोगात्मक रिश्तों की सराहना की।
भारत में इटली के डिप्टी अम्बेसेडर ने कहा कि लियानार्डो का इटली की संस्कृति पर इतना ज्यादा असर है कि उनका ज़िक्र किए बिना इस देश के फाइन आर्ट्स को अभिव्यक्त ही नहीं किया जा सकता है।
चियारा रोस्टैग्नो ने बताया कि लियानार्डो डायरी लिखते थे जिसमें उन्होंने भारत की अपनी यात्रा का ज़िक्र किया है।
डा रोस्टैग्नो और श्री बाल्डी ने इस वर्कशाॅप में छात्रों के उत्साह की सराहना की। इस वर्कशाॅप का आयोजन आर्किटेक्चर विभाग के इक़्तेदार आलम और अरशिया अहमद ने किया।
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