निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए SIR से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान ज़रूरी: JIH
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूचियों में गंभीर अनियमित्ताओं और आशंकाओं की ओर इशारा किया है। उन्होंने सावधान किया कि इन त्रुटिपूर्ण मतदाता सूचियों के आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव नहीं कराई जानी चाहिए। अपनी मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमाअत ने लीडरों और असहमति रखने वालों को राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने, सर्दियों की तैयारियों और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई।
एसआईआर और आगामी विधानसभा चुनावों पर बात करते हुए एपीसीआर के सचिव नदीम खान ने कहा, "भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और ईमानदारी तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आचरण को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं। अगर उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनाव इन चिंताओं को दूर किए बिना कराए जाते हैं तो यह पिछले चुनावों की ही पुनरावृत्ति होगी जिसमें लाखों योग्य मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए थे और सूची में हजारों फर्जी मतदाता जुड़ गए थे। ये आंकड़े चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं। बताया गया है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में मतदाताओं की संख्या एसआईआर से पहले लगभग 18.71 करोड़ थी, जो अंतिम मतदाता सूची में घटकर 16.43 करोड़ रह गई है।
यानी इसमें लगभग 2.29 करोड़ (12.2%) की कमी आई है। इस कमी में उत्तर प्रदेश का हिस्सा लगभग 90% है, जहाँ मतदाताओं की संख्या में करीब 2.04 करोड़ (13.24%) की कमी आई है। दर्ज की गई कमी इस प्रकार है: पंजाब में लगभग 14 लाख, उत्तराखंड में 8 लाख, मणिपुर में 1.3 लाख और गोवा में 1.27 लाख। विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों से नामों के हटने का यह पैमाना एक पारदर्शी समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कोई भी पात्र मतदाता सूची से छूट न जाए।"
नदीम खान ने आगे कहा, "चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा बुरी तरह डगमगा गया है। जब तक चुनावी प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बहाल नहीं होता तब तक आने वाले चुनावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठेंगे। चुनाव की घोषणा होने या चुनाव कराए जाने से पहले जनता की चिंताओं का एक-दो महीने के भीतर समाधान किया जाना चाहिए। हमारी मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर चिंताओं के लिए नैतिक जिम्मेदारी लें और तुरंत अपना इस्तीफा सौंप दें। पूरी एसआईआर प्रक्रिया की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से समीक्षा होनी चाहिए। जिन पात्र मतदाताओं को गलती से सूची से हटा दिया गया है उन्हें वापस शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही चुनाव आयोग को नामों को हटाने, जोड़ने, बहाल करने, आपत्तियों और उनके नतीजों के बारे में राज्यवार स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। विधानसभा चुनाव तय समय पर ही होने चाहिए लेकिन ऐसा तभी हो जब मतदाता सूची से जुड़ी चिंताओं को दूर कर लिया जाए और जनता को यह भरोसा दिलाया जाए कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी है।"
लीडरों और असहमति रखने वालों को राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने के बारे में बात करते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा, " जमाअत नेताओं, कार्यकर्ताओं और असहमति रखने वालों के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध के लिए आपराधिक कार्यवाही और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल की कड़ी निंदा करती है। ऐसी प्रथाएं संस्थानों में जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं, शांतिपूर्ण असहमति को हतोत्साहित करती हैं और लोकतांत्रिक सिद्धांत को कमजोर करती हैं। कानून को निष्पक्ष और समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। वरिष्ठ नेता आजम खान का मामला गंभीर चिंता पैदा करता है। उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं और उन्होंने लंबी अवधि जेल में बिताई है। उनके द्वारा स्थापित मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को भी आधिकारिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। एक अदालत द्वारा उन्हें जमानत दिए जाने और जेल से निकलने के कुछ ही मिनटों के भीतर उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायिक हिरासत में वापस भेज दिया गया। आजम खान मामला सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती देने वालों के खिलाफ किए गए इस तरह के विच-हंट की लंबी सूची में से एक है। हमारा मानना है कि इस तरह की बार-बार की कार्यवाही यह सुनिश्चित करने के लिए बारीकी से जांच करती है कि जांच शक्तियों का उपयोग राजनीतिक विरोध को दंडित करने या असहमति को दबाने के लिए नहीं किया जा रहा है।"
प्रो. सलीम इंजीनियर ने शीतकालीन तैयारियों और प्रदूषण नियंत्रण पर भी बात की और कहा, " जमाअत भारत सरकार और राज्य सरकारों से आग्रह करती है कि वे आने वाली सर्दियों से लोगों को बचाने के लिए समय रहते समन्वित कदम उठाएं। हालात के गंभीर होने का इंतज़ार करने के बजाय, तैयारियां पहले ही शुरू कर दी जानी चाहिए।
सरकार रैन बसेरों का विस्तार करे और उनमें सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराए, लोगों तक गर्म कंबल और कपड़े पहुंचाए, उन्हें गर्म भोजन दे, और अधिक जोखिम वाले इलाकों में मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां स्थापित करे। जमाअत अपने प्रयासों और सहयोगी संगठनों के माध्यम से पूरे देश में सर्दियों के दौरान राहत कार्य चलाती है। इसमें जरूरतमंद लोगों को कंबल बांटना और अन्य तरह की सहायता देना शामिल है, जिसमें धर्म, जाति या पृष्ठभूमि का कोई भेदभाव नहीं किया जाता। प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने भी जनता से भी अपील की है कि वे स्थानीय राहत कार्यों में सहयोग करें और अपने आस-पड़ोस में रहने वाले बुजुर्गों, अकेले लोगों और बेघर लोगों का ध्यान रखें।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद खतरनाक वायु प्रदूषण को रोकने के उपाय करने, निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल और कचरा जलाने के खिलाफ सख्ती बरतने, तथा प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए समन्वित कदम उठाने की भी मांग करती है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुँचने से पहले ही बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए सार्वजनिक जानकारी, निगरानी और स्वास्थ्य सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए।"
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